शहर से सटे गांव हालुवास देवसर माजरा और हालुवास गांव के लिए जलघर निर्माण का रास्ता अब साफ हो गया है। पब्लिक हेल्थ विभाग दोनों ही गांवों की आबादी के लिए 378.50 लाख की लागत से जलघर का निर्माण कराएगा। वहीं छह माह की निर्धारित अवधि में जलघर निर्माण का काम पूरा किए जाने का भी एग्रीमेंट हुआ है। बुधवार को पब्लिक हेल्थ विभाग की एक टीम ने गांव में जलघर निर्माण साइट पर पहुंचकर मैपिंग का काम भी शुरू किया है। वहीं दोनों ही गांवों की पंचायतें जलघर निर्माण के लिए भूमि का प्रस्ताव पास कर पब्लिक हेल्थ विभाग को दे चुकी हैं।
बता दें कि अमर उजाला ने गांव हालुवास देवसर माजरा में भूमिगत जल के दुष्प्रभावों की वजह से कैंसर व अन्य रोगों से ग्रस्त होने के मामले को प्रमुखता से उठाया था। इस मामले में सिलसिलेवार समाचारों को छापा और ग्राउंड रिपोर्ट को उजागर किया। इसके बाद पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारी भी हरकत में आए और जलघर निर्माण की औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद निर्माण से परहेज कर रहे अधिकारियों को आखिरकार गांव में सुध लेने जाना पड़ा।
यह है मामला : भिवानी-चरखी दादरी मुख्य मार्ग पर शहर से मात्र पांच किलोमीटर दूर स्थित गांव हालुवास देवसर माजरा को वर्ष 1999 तक गांव बापोड़ा के मुख्य जलघर से पेयजल आपूर्ति में नहरी पानी उपलब्ध कराया जाता रहा था। मगर बापोड़ा के जलघर का दायरा कम किया तो गांव हालुवास और हालुवास देवसर माजरा को नहरी पानी मिलना बंद हो गया। गांव की पेयजल आपूर्ति भूमिगत जल पर आ टिकी। इसके लिए न्यू धिराणा माइनर के समीप ट्यूबवेल लगाकर ग्रामीणों को भूमिगत जल आपूर्ति में दिया जाने लगा। पहले से ही भूमिगत जल स्तर काफी नीचे जाने और भूमिगत पानी खराब होने की वजह से इसमें घातक तत्व बाहर आने लगे। पेयजल में इसी पानी को इस्तेमाल करने पर लोग भी बीमार होने लगे। गांव में कई लोगों को कैंसर तक हो गया। जिससे कई ग्रामीणों की मौत भी हुई और कई अभी भी कैंसर का इलाज करा रहे हैं। इस समस्या के बाद पब्लिक हेल्थ विभाग ने पानी का टीडीएस जांचा तो वह 11 हजार से अधिक मिला। इसके बाद गांव हालुवास देवसर माजरा में बना वाटर स्टोरेज टैंक को भी कंडम घोषित करते हुए इसे स्थायी तौर पर बंद कर दिया। लेकिन फिर भी ग्रामीणों की समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीण भूमिगत जल के सेवन से गंभीर बीमारियों के संक्रमण से घिरते चले गए। ग्रामीणों ने गांव में जलघर निर्माण के लिए पब्लिक हेल्थ को चार एकड़ भूमि मुहैया कराई। जबकि मुख्य सड़क से रास्ता के लिए हालुवास की पंचायत ने भी 33 फीट का रास्ता देने का प्रस्ताव पास कर पब्लिक हेल्थ को सौंप दिया। मगर फिर भी पांच साल से अधिकारी भूमि मुहैया कराए जाने के बावजूद जलघर निर्माण में आनाकानी करते रहे।
18 साल बाद अब जगी ग्रामीणों को फिर से नहरी पानी की उम्मीद
गांव हालुवास देवसर माजरा और हालुवास गांव में मुख्य पेयजल निर्माण शुरू होने से 18 साल बाद फिर से नहरी पानी मिलने की उम्मीद जगी है। इन दोनों गांवों में जलघर बनने के बाद गांव के पास से गुजरने वाली देवसर माइनर से निकलने वाली न्यू धीराणा माइनर के जरिए नहरी पानी जलघर के टैंकों तक पहुंचाया जाएगा। फिर जलघर में इसी पानी को क्लोरीनेशन के बाद पेयजल आपूर्ति में सप्लाई किया जाएगा। फिलहाल ग्रामीण भूमिगत जल बिना क्लोरीनेशन या बिना स्वच्छता प्रक्रिया के ही पीने को मजबूर हैं।
गांव में जलघर निर्माण को लेकर पंचायत पूरी तरह से संजीदा है। जलघर निर्माण के लिए पंचायत स्तर पर कोई अड़चन नहीं है। अधिकारी जल्द से जल्द काम शुरू करें। अधिकारियों को अगर काम के दौरान कोई दिक्कत आती है तो पंचायत उसे दूर कराएगी।
- संदीप तंवर, सरपंच हालुवास देवसर माजरा।
पंचायत ने जलघर से मुख्य सड़क तक 33 फीट रास्ता देने का प्रस्ताव पब्लिक हेल्थ विीभाग को सौंपा है। अगर पब्लिक हेल्थ को रास्ता बनाने के दौरान कोई भी परेशानी आती है तो फिर मैं खुद खड़ा होकर उस दिक्कत को दूर कराउंगा। रास्ते की जमीन पर किसी तरह का कोई अतिक्रमण या कब्जा नहीं है। ये जमीन पंचायत की है और विभाग बेवजह जलघर निर्माण में आनाकानी कर रहा है।
- हरीश कुमार, सरपंच हालुवास।
वाटर वर्क्स निर्माण के लिए संबंधित एजेंसी को काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। साइट पर मैपिंग का काम शुरू किया गया है। वीरवार से जलघर निर्माण का काम शुरू करा दिया जाएगा। जलघर छह माह की अवधि के दौरान पूरा होगा, जिस पर 378.50 लाख की लागत आएगी।
- बलविंदर नैन, कार्यकारी अभियंता शहरी पेयजल शाखा भिवानी।