भिवानी। प्रदेश की महिला एवं सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी ने बताया कि शुक्रवार की मध्यरात्रि को टांगरी नदी का जलस्तर 9.5 फीट (लगभग 20,900 क्यूसेक) तक पहुंच गया था जबकि खतरे का निशान 7.0 फीट (15,400 क्यूसेक) है। यह स्थिति पिछले वर्षों में अंबाला छावनी की कई कॉलोनियों के जलमग्न होने और करोड़ों रुपये के नुकसान का कारण बन चुकी है लेकिन इस बार समय रहते उठाए गए कदमों से खतरा टल गया।
मंत्री ने बताया कि सिंचाई विभाग ने इस बार बारिश से पहले ही टांगरी नदी की खोदाई और चौड़ीकरण का कार्य शुरू कर दिया था। बारिश के कारण फिलहाल आधा काम ही पूरा हो पाया लेकिन इससे नदी की जलनिकासी क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। पानी का बहाव सुरक्षित तरीके से हुआ और हजारों लोगों को बड़ी राहत मिली। उन्होंने कहा कि मानसून समाप्त होते ही शेष कार्य भी पूरा किया जाएगा।
सुबह से रात तक लगातार बढ़ा जलस्तर, पर नहीं भरे निचले क्षेत्र
श्रुति चौधरी ने बताया कि छह अगस्त को सुबह 11 बजे नदी में 11,000 क्यूसेक पानी था जो शाम 4 बजे तक 15,400 क्यूसेक और मध्यरात्रि तक 20,900 क्यूसेक हो गया। पहले ऐसे जलस्तर पर न्यू टैगोर गार्डन, न्यू एकता विहार, प्रभु प्रेमपुरम, रामपुर, सरसेहड़ी, चंदपुरा और करधान जैसे क्षेत्रों में पानी भर जाता था लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि नदी को गांव रामगढ़ माजरा से गांव भुन्नी तक गहरा और चौड़ा किया जा रहा है, वहीं सरसेहड़ी और चंदपुरा में अस्थायी बांध भी बनाए गए हैं। इन प्रयासों से इस बार अधिक जलस्तर होने के बावजूद सरसेहड़ी, चंदपुरा और आसपास के क्षेत्र सुरक्षित रहे। मंत्री ने कहा कि पहले महेशनगर पंप हाउस के गेट नदी में केवल 2.5 फीट पानी आने पर बंद हो जाते थे जिससे शहर में बारिश का पानी भर जाता था लेकिन इस बार खुदाई के कारण गेट 4.5 फीट पानी आने पर ही बंद हुए और लोगों को भारी राहत मिली। उन्होंने दोहराया कि किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय सरकार हर समय लोगों के साथ खड़ी है।