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अब पॉलिथीन कचरा भी नहीं बनेगा शहर से सीवरेज पानी की निकासी में रोड़ा

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14 डिस्पोजल के टैंक में कूड़ा निकालने के लिए लगाई गई मैकेनिकल स्क्रीन मशीन। - फोटो : Bhiwani
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अब पॉलीथीन कचरा शहर की सीवरेज व्यवस्था को ठप नहीं कर पाएगा। और न ही पॉलिथीन गंदे पानी की निकासी में बाधा बन पाएंगी। इसके लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने करीबन 25 लाख रुपये की लागत से देवसर चुंगी स्थित मैन डिस्पोजल के अंदर दो मैकेनिकल स्क्रीन लगाई हैं। जो शहर से सीवरेज सिस्टम के जरिए आने वाले पॉलिथीन कचरे को साफ करने का काम करेंगी। इससे पहले रोजाना चार सफाई कर्मचारी मैन डिस्पोजल के टैंकों से पॉलिथीन कचरे को निकालने का काम मैनुअल करते थे। तीन टैंकों से दो ट्रॉली पॉलिथीन कचरा निकालने में कर्मचारियों को पूरा दिन लग जाता था। अब ये कार्य मैकेनिकल स्क्रीन से चंद मिनटों में हो जाएगा।
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जिला प्रशासन द्वारा शहर को पॉलिथीन मुक्त बनाने का अभियान पिछले काफी अर्से से चलाया हुआ है। इसके बावजूद भी शहर के अंदर पॉलिथीन का इस्तेमाल धड़ल्ले से चल रहा है। इतना ही नहीं पॉलिथीन ना केवल पर्यावरण प्रदूषण का र्प्याय बनी हैं, बल्कि शहर की पुराने सीवरेज सिस्टम की भी दुश्मन बनी है। क्योंकि शहर की सीवरेज व्यवस्था को ठप करने में पॉलिथीन कचरा सबसे मुख्य कारण है। इसी समस्या का हल खोजने के मकसद से जिला प्रशासन ने पर्यावरण प्रदूषण व सीवरेज सिस्टम को जाम होने से बचाने के लिए पॉलिथीन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया है।
छह माह तक चला शहर में पॉलिथीन धरपकड़ का अभियान
जिला प्रशासन द्वारा जनवरी माह से लेकर जून माह तक शहर के अंदर पॉलिथीन की धरपकड़ के लिए अभियान चलाया। नगर परिषद सहित विभिन्न विभागों की नौ टीमों ने करीबन 12 क्विंटल पॉलिथीन को छह माह के अंतराल के दौरान जब्त कर डाला। इतना ही नहीं इतनी बड़ी तादाद में पॉलिथीन जब्त किए जाने के दौरान लाखों रुपयों का जुर्माना भी दुकानदारों पर लगाया गया। मगर इसके बावजूद भी पॉलिथीन का इस्तेमाल नहीं रुका।
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करीबन 80 साल पुराना है शहर का सीवरेज सिस्टम
भिवानी शहर का सीवरेज सिस्टम करीबन 80 साल पुराना है। इस सीवरेज सिस्टम का करोड़ों रुपयों के बजट से जीर्णोद्धार किया जा चुका है। जिसके बाद इसकी उम्र भी बढ़ गई है। हालांकि इतने पुराने सीवरेज सिस्टम के बावजूद शहर के निचले इलाकों में थोड़ी सी बारिश में ही बरसाती पानी जमा हो जाता है और कई हिस्सों में सीवरेज भी बैक मारने लगते हैं। पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारी इसकी वजह सिर्फ पॉलिथीन कचरे को ही मान रहे हैं। क्योंकि पॉलिथीन कचरा सीवरेज में पहुंचने के बाद नष्ट नहीं होता, बल्कि सीवरेज को पूरी तरह से जाम कर देता है। यहीं वजह है कि जब पानी का दबाव सीवरेज पर ज्यादा होता है तो पॉलीथीन कचरा सीधा डिस्पोजल तक पहुंच जाता है।
शहर के मैन डिस्पोजल पर मैकेनिकल स्क्रीन लगाई गई हैं। ये लगातार सीवरेज के जरिए यहां तक आने वाले पॉलिथीन कचरे को टैंकों से साफ कर बाहर निकालती रहती है। बरसाती दिनों में तो रोजाना टैंक से ढाई से तीन ट्राली पॉलिथीन कचरा भी निकल जाता है, जबकि सामान्य दिनों में एक से डेढ़ ट्राली पॉलिथीन कचरा यहां निकलता है। मैनुअल तौर पर काम कराने में चार सफाई कर्मचारियों को पूरा दिन लग जाता था। मगर अब यह काम मिनटों में जब भी जरूरत हो झट से हो जाता है।
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-महेंद्र सिंह, जेई मैन डिस्पोजल भिवानी।
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