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Bhiwani News: नागरिक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए एक माह तक का इंतजार, एकमात्र चिकित्सक पर सारा भार

Tue, 17 Jun 2025 12:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर लगी मरीजों  की भीड़। 
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भिवानी । जिला नागरिक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच सुविधा सीमित संसाधनों के कारण संकट से जूझ रही है। यहां अल्ट्रासाउंड जांच की जिम्मेदारी केवल एक रेडियोलॉजिस्ट के कंधों पर है, जिसके चलते मरीजों को जांच के लिए एक माह तक इंतजार करना पड़ रहा है।
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अस्पताल के अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर सुबह से शाम तक मरीजों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। स्टाफ द्वारा लगातार यह घोषणा की जाती है कि गर्भवती महिलाओं की जांच को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि अन्य मरीजों को अपनी बारी के लिए नंबर लेकर इंतजार करना पड़ता है। कई मरीजों को जांच के लिए तीन से चार घंटे तक कुर्सियों पर बैठकर इंतजार करना पड़ता है, जिससे बुजुर्गों और गंभीर रोगियों को काफी परेशानी होती है।
अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 300 से 350 मरीज अल्ट्रासाउंड जांच के लिए पहुंचते हैं, लेकिन जांच केवल 60 से 70 मरीजों की ही हो पाती है। इसमें से 25 से 30 गर्भवती महिलाएं और 15 से 20 मरीज वार्डों में भर्ती होते हैं। शेष मरीजों को आगे की तारीख दी जाती है, जो पांच दिन से लेकर एक माह तक की हो सकती है। समय पर जांच न होने के कारण कई मरीज मजबूरन निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों का रुख करते हैं, जहां उन्हें 700 से 1700 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। अगर एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट अवकाश पर होता है, तो स्थिति और भी बिगड़ जाती है, और मरीजों को ज्यादा दिनों तक इंतजार करना पड़ता है।
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अस्पताल प्रशासन का कहना है कि फिलहाल अल्ट्रासाउंड जांच के लिए सिर्फ एक रेडियोलॉजिस्ट नियुक्त है, जबकि मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में प्रशासन ने उच्च अधिकारियों से अतिरिक्त स्टाफ की मांग की है, ताकि मरीजों को जल्द और बेहतर सेवाएं मिल सकें।



मैं पेट दर्द होने पर अस्पताल में दवा लेने आया था। चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए बोला। मैं जांच केंद्र पर गया तो स्टाफ ने मेरी पर्ची पर एक सप्ताह बाद की तारीख लिख कर मेरा नंबर लगा दिया। जब मैंने कहा कि मेरे पेट में ज्यादा दर्द है। स्टाफ ने कहा कि एक दिन में सिर्फ 60 मरीजों की ही जांच कर सकते हैं। इसलिए इंतजार करना होगा। फिलहाल निजी केंद्र पर जांच करवाने के लिए जा रहा हूं।
- अनिल, मरीज।

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पिछले एक सप्ताह से अस्पताल में मेरी बेटी दाखिल है। पहले आपातकालीन विभाग में दाखिल थी। अभी वार्ड नंबर सात में दाखिल है। बेटी से बैठा भी नहीं जा रहा। वार्ड वाले आपातकाल में भेज देते हैं। लेकिन लिफ्ट भी खराब है तो सीढ़ियों से बेटी को लाने में परेशानी हो रही है। सुबह से अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर बैठे हैं। यहां चिकित्सक भी नहीं है। पूछने पर स्टाफ बता रहा है कि बैठक में गए हुए हैं। सभी मरीज यहां परेशान हैं।
-बबली शर्मा, तीमारदार।
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मेरी मां अस्पताल में दाखिल है। अल्ट्रासाउंड केंद्र में पिछले एक घंटे से बैठे हैं। लेकिन मां की हालात बैठने लायक भी नहीं है। अस्पताल के स्टाफ से बात करते हैं तो कहते हैं कि अभी इंतजार करना पड़ेगा। अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर भीड़ रहती है। सुबह से ही परेशान हैं। अस्पताल प्रशासन को अल्ट्रासाउंड सुविधा को बढ़ाना चाहिए, ताकि मरीजों को परेशानी न हो।
शालू, तीमारदार।
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अस्पताल में फिलहाल एक रेडियोलॉजिस्ट है। वहीं अल्ट्रासाउंड जांच के लिए प्रतिदिन 300 मरीज आ रहे हैं। लेकिन एक चिकित्सक एक दिन में 60 मरीजों की ही जांच कर सकता है। गर्भवती महिलाओं व आपात विभाग के मरीजों की जांच पहले करनी पड़ती है। इस कारण मरीजों को इंतजार करना पड़ रहा है। अतिरिक्त रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति करने के लिए मांग पत्र भेज रखा है।
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- डॉ. बलवान सिहं, कार्यवाहक प्रभारी जिला नागरिक अस्पताल भिवानी।
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