जूई। चकबंदी न होने से दो गांवों जूई बिचली और जूई खुर्द के लोगों को भारी परेशानी हो रही है। इन दोनों गांवों का विकास कई साल से ठप है। दो राष्ट्रीय राजमार्गों पर बसा होने के बाद भी गांव में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। खेत से जुड़े रास्ते के लिए आए दिन विवाद हो रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि सरकार के उदासीन रवैये से दोनों गांवों के लोग दुखी हैं लेकिन नई सरकार में कैबिनेट मंत्री श्रुति चौधरी, राज्यसभा सदस्य किरण चौधरी और सांसद धर्मबीर सिंह से ग्रामीणों को आस जगी है। ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। ग्रामीणों ने सरकार से यह समस्या सुलझाने की मांग की है।
गांव में न काॅलेज और न ही बस स्टैंड : जूई खुर्द निवासी मांगेराम, बीडीसी सदस्य बृजेश, महेंद्र सिंह, राजेश श्योराण, मनीराम, मंदीप, जुई बिचली निवासी उमेद लांबा, मंदीप ढिल्लो, संदीप लांबा आदि ने बताया कि इन दोनों गांवों की चकबंदी वर्ष 1972 के आसपास हुई थी। उस समय जमीन की कीमत उपजाऊ और बरानी के हिसाब से लगती थी। उस चकबंदी में कुछ लोगों ने जमीन में हेराफेरी करने की कोशिश की तो बाकी लोगों ने कब्जे नहीं पकड़े। भूप शर्मा, मांगेराम जांगड़ा, लाला बीडीसी, सुरेश शर्मा, महेंद्र शर्मा, नवनीत, विजय सेठ, विनोद जांगड़ा ने बताया कि वह 46 साल से गांव की चकबंदी का इंतजार कर रहे हैं।
इस कार्य में देरी के कारण पहले गांव ब्लॉक बनना प्रस्तावित था। अब वह गांव कैरू ब्लॉक से जुड़ गया। गांव में काॅलेज, आईटीआई, स्टेडियम, व्यायामशाला की दरकार है। गांव के दोनों राजमार्गों पर बस स्टैंड बनाकर जूई से लाडावास, जुई से प्यारे की ढाणी, जुई से सीधा डांडमा तक सड़क निर्माण की भी जरूरत है।