दुनियाभर में दहशत का पर्याय बनी बीमारी इबोला प्रभावित क्षेत्र दक्षिण अफ्रीका से यहां लौटे तीन मिलिट्री जवानों की सेहत पर स्वास्थ्य विभाग की टीम नजर गड़ाए है। हर जवान की सेहत की जांच का जिम्मा एक टीम को सौंपा गया है। हालांकि अभी तक किसी भी जवान में बीमारी के कोई लक्षण नजर नहीं आए है।
स्वास्थ्य विभाग ने उच्च अधिकारियों के निर्देश पर इन जवानों के स्वास्थ्य पर नजर रखने के साथ-साथ सामान्य अस्पताल में भी एक अलग वार्ड तैयार किया है। वार्ड में इबोला के अलावा डेंगू, चिकनगुनिया के मरीजों के लिए भी व्यवस्था की गई है।
पूरे विश्व के लिए चुनौती बनती जा रही इबोला बीमारी से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है। अधिकतर केस साउथ अफ्रीका में सामने आए हैं। हाल ही में साउथ अफ्रीका से भारतीय आर्मी के जवान लौटे हैं। इनमें एक जवान भिवानी शहर के सेक्टर 13, एक सिवानी और तीसरा जवान हांसी रोड स्थित एक गांव से है। घर लौटे जवानों में यह बीमारी तो नहीं है, इसी आशंका के चलते स्वास्थ्य विभाग की टीम इन पर नजर टिकाए है। तीनों जवानों के स्वास्थ्य की रिपोर्ट ली जा रही है।
क्या है इबोला संक्रमण
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक चमगादड़ से इबोला वायरस फैलता है। इबोला वायरस दो से 21 दिन में शरीर में पूरी तरह फैल जाता है। संक्रमण से कोशिकाओं से साइटोकाइन प्रोटीन बाहर आने लगता है कोशिकाएं नसों को छोड़ने लगती हैं और उससे खून आने लगता है। अभी तक इबोला का इलाज नहीं खोजा जा सका है। मरीज के संपर्क में आने से इबोला संक्रमण होता है। मरीज के खून, पसीने के संपर्क से और छूने से ये फैलता है। महामारी वाले इलाके के पशुओं के संपर्क से भी फैलता है।