हांसी गेट के समीप रोड पर लगे स्टॉल पर रखा गुलाल।
भिवानी। होली पर्व पर बाजारों में सिंथेटिक (कृत्रिम) रंगों की भरमार है। अभिभावक भी बच्चों को बड़े चाव से रंग दिलवा रहे हैं। लेकिन ये सिंथेटिक रंग लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। सिंथेटिक रंगों में रसायन पदार्थों का प्रयोग किया जाता है। ये रंग त्वचा के साथ ही आंखों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। सिंथेटिक रंगों के बजाय हर्बल रंगों का प्रयोग करें।
जिला नागरिक अस्पताल में कार्यरत नेत्र व चर्म रोग विशेषज्ञ ने कहा कि होली का त्योहार को शांति पूर्वक तरीके से बनाएं। सिंथेटिक रंगों का प्रयोग से बचें। सिंथेटिक रंग त्वचा पर खुजली व आंखों में जलन, संक्रमण कर सकती हैं। इसलिए ऐसे रंगों से दूरी बना कर चलें। इसके अलावा मौसम में बदलाव जारी है। ठंडे पानी से बच्चों को दूर रखें। वहीं नागरिक अस्पताल में भी खांसी, जुकाम व बुखार के मरीज ज्यादा देखे जा रहे हैं। इस कारण बच्चों के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत है।
होली पर्व पर सिंथेटिक रंगों का प्रयोग न करें। सिंथेटिक रंग के प्रयोग से आंखों में जलन हो सकती है। होली खेलते समय ये ध्यान रखना जरूरी है कि रंग आंखों में न जाए। अगर गलती से चला भी जाता है तो तुरंत ठंडे पानी से आंखों को साफ करें। इसके बाद भी आंख में किसी प्रकार की परेशानी आती है तो अपने नजदीकी नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श करें। किसी प्रकार का उपचार अपनी मर्जी से शुरू न करें।
- डॉ. हरजीत, नेत्र रोग विशेषज्ञ, जिला नागरिक अस्पताल भिवानी।
सिंथेटिक रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से बच्चों को तो बिल्कुल भी नहीं। सिंथेटिक रंग त्वचा के लिए हानिकारक साबित हो सकती है। अगर ज्यादा ही जरूरी हो जाए तो हर्बल रंगों का प्रयोग करें। होली खेलने से पहले अपने शरीर पर नारियल का तेल लगा लें। इसके बाद सिंथेटिक रंगों के प्रभाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
- डॉ. जनश्रुति, त्वचा रोग विशेषज्ञ, जिला नागरिक अस्पताल, भिवानी।