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खटाई में पड़ी मकानों के यूनिक नंबर की योजना

Thu, 07 Jan 2016 12:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला भिवानी
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भिवानी। वर्षों पहले शहर के हर घर को मकान नंबर के तौर पर पहचान दी गई थी। पिछले करीब 20 वर्षों में मकान दुकान तो खूब बनी मगर मकानों को नई पहचान नहीं मिली। वर्ष 2012 में शहर के प्रत्येक मकान को नए नंबर देने का प्लान बनाया और सर्वे करवाया गया। मगर पिछले तीन साल से कंप्यूटराइजेशन के फेर में प्लान ठंडे बस्ते में है।
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शहरी निकाय निदेशालय ने वर्ष 2011 में शहर में नए बने मकानों का सर्वे कर उन्हें नए यूनिक नंबर देने का प्लान बनाया था। प्लान के तहत चंडीगढ़ मुख्यालय से एक सॉफ्टवेयर भी आना था, जिसमें सारा रिकार्ड दर्ज हो सके और उसी के अनुसार सभी मकानों को नंबर दिए जा सके। वर्ष 2012 में इसके लिए सर्वे भी हुआ। शहर में करीब 65 हजार मकान मिले और करीब 12 हजार दुकानें। नगर परिषद की इन हाउस बैठक में सर्वे और कंप्यूटराइजेशन का प्रस्ताव भी पास हुआ। मगर दो साल बाद भी पूरा रिकार्ड कंप्यूटराइज्ड नहीं हो पाया है और इसी के फेर में मकानों को नए यूनिट नंबर देने का काम अटका है। सर्वे से पहले करीब 30 हजार यूनिट ही नप के रिकार्ड में दर्ज है।
कैसे दी जाएंगी यूनिट, असमंजस में लोग
नई यूनिट देने की प्रक्रिया को लेकर लोगों में भी असमंजस की स्थिति है। असमंजस है कि नए सिरे से एक से यूनिट शुरू की जाएगी या पहले से दी हुई यूनिट के साथ ही ए, बी, सी यूनिट दी जाएगी। अब पूरा रिकार्ड बदलना संभव नहीं है। ऐसे में फिलहाल प्लानिंग यूनिट के आगे ए, बी, सी ही देने की योजना है।
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एक यूनिट पर चल रहे तीन से पांच मकान
करीब 15-20 साल पहले हुई नंबरिंग के तहत दिए गए मकान आज तीन से पांच हिस्सों में बंट चुके हैं। अधिकतर ने अपने मकान के प्लॉट काट बेच दिए है। जिन पर अब कोई नंबर नहीं है। मगर नप के रिकार्ड में वहां आज भी एक ही मकान है। टैक्स भी आज तक उसी एक यूनिट के अनुसार दिया जा रहा है। इसी कारण नप को प्रॉपर्टी टैक्स में बहुत कम आय हो रही है। अधिकतर मकान मालिक टैक्स ही नहीं भर रहे।
अपने स्तर पर मकानों को नंबर दे रहे लोग
पिछले 15-20 सालों में अनेक नई कॉलोनियां विकसित हुई। जिनमें लोग अपने स्तर मकान नंबर दे रहे है। इनमें शहर की बाहरी कॉलोनियां खासकर है। शहर में अनेक फ्लैट भी बने है, जिनके भी अपने ही नंबर है। इस कारण लोगों में काफी असमंजस की स्थिति भी रहती है।
वर्जन:::
शहर में मकानों, दुकानों का सर्वे हो चुका है। रिकार्ड कंप्यूटराइज्ड करना है। उसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। शहर के मकानों को नए यूनिक नंबर का प्लान था, इस बारे में उच्च अधिकारियों को फैसला लेना है।
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संजय यादव, सचिव, नगर परिषद

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