आपातकालिन विभाग में एक बेड पर लेटे दो मरीजों का चेकअप करती स्वास्थ्य कर्मी।
भिवानी। नागरिक अस्पताल के आपातकालीन विभाग में एक बेड पर दो मरीजों का उपचार किया जा रहा है। हाल ही में सिविल सर्जन डॉ. रघुवीर शांडिल्य ने आपातकालीन विभाग का निरीक्षण किया था, उस दौरान कई खामियां मिली थीं, जिस पर संबंधित कर्मचारियों से भी जवाब तलब किया गया। लेकिन इसके बावजूद आपात विभाग में अभी भी हालत नहीं सुधरे हैं।
बुधवार को आपातकालीन विभाग की लाइव रिपोर्टिंग की गई। इस दौरान एक ही बेड पर दो गंभीर मरीज लेटा रखे थे। इन मरीजों के हाथों में ड्रिप लगी थी और मुंह से कराह निकल रही थी। कुछ तो खराब हालत में यहां लाए गए थे। बावजूद उन्हें यहां कोई बैड नहीं मिला। व्यवस्था की नजाकत को देखते हुए वहां तैनात स्टाफ भी उन्हें उपचार देना जरूरी समझा।
आपातकालीन विभाग में गंभीर मरीजों को ही लेकर आते हैं, चाहे वे किसी झगड़े या फिर एक्सीडेंट में गंभीर घायल हुए हैं या फिर किसी गंभीर बीमारी की वजह से मरीज की हालत बिगड़ गई है। ऐसी स्थिति में संक्रमित बीमारी वाले मरीजों के साथ किसी दूसरे मरीज को लेटाना संक्रमण बढ़ने का खतरा भी बढ़ा रहा है। हालांकि वहां तैनात स्टाफ पूरी एहतियात बरते हुए मुंह पर अब भी मास्क का प्रयोग कर रहे हैं।
आपातकालीन विभाग में हैं 23 से 30 बेड
जिला नागरिक अस्पताल के आपातकालीन विभाग में करीब 25 से 30 बेड ही हैं। लेकिन अधिकांश समय ये बेड मरीजों से भरे रहते हैं। इसकी वजह है चौबीसों घंटे आपातकालीन विभाग में स्वास्थ्य सेवाओं का निरंतर जारी रहना। हालांकि प्राथमिक उपचार के बाद जब मरीज थोड़ा राहत महसूस करता है तो उसे संबंधित वार्ड में शिफ्ट किए जाने के निर्देश भी हैं। लेकिन कुछ मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें सुबह लाया जाता है मगर शाम तक उनकी हालत पर लगातार निगरानी रखना जरूरी होता है। ऐसी स्थिति में आपातकालीन विभाग की कम बेड और ज्यादा मरीजों की वजह से व्यवस्था बिगड़ना भी लाजमी है।
आपातकालीन विभाग में कुछ दिन पहले औचक निरीक्षण में कई खामियां मिली थीं, जिन्हें दूर कराने के संबंध में पीएमओ को भी निर्देश दिए गए थे। आपातकालीन विभाग में आठ से दस अतिरिक्त बेड की व्यवस्था कराने के लिए एक्सटेंशन किए जाने का भी मसौदा तैयार किया है। इस संबंध में बीएंडआर अधिकारियों से भी बातचीत हुई है। संभावित जगह चिह्नित कर आपात विभाग का विस्तार कराएंगे। वहीं मरीज की हालत में थोड़ा सुधार होने के बाद उसे तुरंत वार्ड में शिफ्ट करना चाहिए ताकि आपातकालीन विभाग में बेड खाली हो सकें।
-डॉ रघुवीर शांडिल्य, सिविल सर्जन, भिवानी।