भिवानी। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जोगेंद्र सिंह की अदालत ने मारपीट के सात साल पुराने मामले में शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए पांच आरोपियों को दोषी ठहराया। अदालत ने इनमें से दो दोषियों को एक-एक वर्ष के सश्रम कारावास और 2500-2500 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई जबकि तीन बुजुर्ग अभियुक्तों को सुधरने का अवसर देते हुए प्रोबेशन पर रिहा कर दिया।
अधिवक्ता अजय वर्मा ने बताया कि वर्ष 2017 में गांव खरक निवासी राजबाला, नरेश और सज्जन के साथ पांचों आरोपियों ने मारपीट की थी। पीड़ित पक्ष की शिकायत पर सदर थाना भिवानी पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी पांचों को दोषी पाया।
अदालत ने जैबीर (72), कैलाश (65) और सुभाष (60) को उनकी आयु, स्वास्थ्य की स्थिति और किसी पूर्व अपराध में दोष सिद्ध न होने को ध्यान में रखते हुए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 360 के तहत प्रोबेशन का लाभ दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि प्रोबेशन पर रिहाई एक निवारक उपाय है जिससे अभियुक्त कारावास के नकारात्मक प्रभावों से बचकर समाज में सुधार का अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
तीनों को छह माह की प्रोबेशन अवधि के लिए 40 हजार रुपये का प्रोबेशन बॉन्ड और इतनी ही राशि की एक जमानत प्रस्तुत करनी होगी। इस अवधि में वे न तो वही अपराध दोहराएंगे और न ही कोई अन्य आपराधिक गतिविधि में शामिल होंगे। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि तीनों अभियुक्त वृद्ध और अस्वस्थ हैं जैबीर सबसे बुजुर्ग हैं और चलने-फिरने में असमर्थता झेल रहे हैं जबकि कैलाश और सुभाष भी स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त हैं।
वहीं अदालत ने मंदीप उर्फ मोनू और राम बाबू उर्फ प्रदीप को अपराध की प्रकृति, गंभीरता और उनके पूर्व आचरण को देखते हुए प्रोबेशन का लाभ देने से इन्कार कर दिया। दोनों दोषियों को एक-एक वर्ष का कठोर कारावास और 2500-2500 रुपये का जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई गई है।