भिवानी। हनुमान जोहड़ी मंदिर धाम व युवा जागृति एवं जनकल्याण मिशन ट्रस्ट की ओर से बालयोगी महंत चरणदास महाराज के नेतृत्व में हनुमान जन्मोत्सव से शुरू की गई 41 दिवसीय अढ़ाई कोसी परिक्रमा मंगलवार को 25वें दिन भी जारी रही। इस दौरान यात्रा का स्वामी जीतू धानक समाज कल्याण सेवा समिति के तत्वावधान में परिक्रमा मार्ग पर स्वागत किया गया।
इस मौके पर बालयोगी महंत चरणदास महाराज ने कहा कि यह सम्मान उनका नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति का सम्मान है। यह परिक्रमा सामाजिक सद्भाव को समृद्ध करती है। अढ़ाई कोसी परिक्रमा का मुख्य उद्देश्य सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाना है। परिक्रमा के माध्यम से न केवल सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, बल्कि सामाजिक एकता व भाईचारे को भी मजबूत करने की दिशा में यह परिक्रमा बेहद लाभकारी साबित हो रही है।
चरणदास महाराज ने बताया कि 41 दिवसीय परिक्रमा का समापन पूर्णाहुति, यज्ञ एवं प्रसाद वितरण के साथ होगा। इस अवसर पर समिति प्रधान राजेश डाबला, उपप्रधान राजू सोलंकी, बाबा साधुराम इंदौरा, पार्षद विनोद बेडवाल, अधिवक्ता धीरज सैनी, दिनेश दाधीच, ओमप्रकाश वर्मा मौजूद रहे।
भगवान की कथा में छिपा जीवन का सार : विदुषी वेला पारीक
भिवानी। न्यू हाउसिंग बोर्ड दादरी गेट स्थित पार्क में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा वाचक विदुषी वेला पारीक ने आध्यात्मिक विचारों से भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उन्होंने कहा कि भगवान की कथा में जीवन का सार छिपा है। इसे आत्मसात करके ही हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं।
धुंधकारी और गो करण प्रसंग पर उन्होंने बताया कि शरीर पंच तत्वों से निर्मित है। इसमें काम, क्रोध जैसी पांच विकार रूपी गणिकाएं विद्यमान हैं। यदि संतान कुपात्र हो जाए तो उससे मुक्ति का मार्ग श्रीमद्भागवत गीता के अध्ययन और उसके आचरण में ही निहित है।
कथा में शुकदेव प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि जब शिवजी पार्वती को कथा सुना रहे थे, पार्वती को नींद आ गई। कथा को छुपकर सुन रहे शुकदेव ब्रह्म ज्ञान को प्राप्त कर गए। इस रहस्य को जानकर शिवजी शुकदेव के पीछे दौड़े और शुकदेव वेदव्यास जी की धर्मपत्नी के गर्भ में प्रवेश कर गए। इस धार्मिक अवसर पर प्रदीप शर्मा, बालकिशन मलिक, बिजेंद्र यादव, सुरेंद्र सिंघल, शिक्षाविद राजेश मुखी आदि मौजूद रहे।