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Bhiwani News: जहां नहीं थी छांव, वहां जमा दिए त्रिवेणी के पांव

Sat, 16 Sep 2023 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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भिवानी। जहां तेज धूप से बचने के लिए दूर-दूर तक मुसाफिरों के लिए कोई छांव नहीं थी, वहां पर त्रिवेणी के पांव जमा कर हिंदी के प्रोफेसर ने उन जगहों को खास पहचान दिलाई है। दरअसल, ज्योतिष आचार्य का ज्ञान रखने वाले हिंदी के प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार न केवल पर्यावरण संजोने में अनूठा योगदान दे रहे हैं, बल्कि ज्योतिष के हिसाब से त्रिवेणी का रोपण पर उसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी सबको रूबरू करा रहे हैं। त्रिवेणी लगाने से से पर्यावरण के साथ-साथ ओजोन भी सबल हो रहा है।
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तोशाम को बनवारी लाल जिंदल सुईवाला कॉलेज में बतौर हिंदी प्राध्यापक के तौर पर कार्य करने वाले गांव देवसर निवासी डॉ. सुरेश कुमार पिछले करीब नौ सालों से 250 त्रिवेणी लगा चुके हैं। ज्योतिषाचार्य के तौर पर भी डॉ. सुरेश कुमार को जाना जाता है। उनका कहना है कि त्रिवेणी (वट,पीपल, नीम) हमारे ब्रह्मांड की तरह ही तीन शक्तियों के प्रतीक माने जाते हैं। संतों में इन शक्तियों के नाम सत्व, रजस, तमस है। आयुर्वेदाचार्य ने वात्त, पित्त, कफ माना है, जबकि धर्माचार्यों ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश मानते हैं। वैज्ञानिकों ने इसे इलेक्ट्रान, प्रोटान, न्यूट्रान का नाम दिया है। त्रिवेणी वृक्ष प्रकृति को शुद्ध, पवित्र रखते हैं। समस्त धरा के प्राणियों को स्वस्थ रखने में अहम योगदान है। ये ऐसे भंडार हैं जो चौबीसों घंटे ऑक्सीजन तो देते ही हैं, पर्यावरण में मौजूद बैक्टीरिया को भी नष्ट कर देते हैं। इन वृक्षों का प्रभाव प्रकृति और ओजोन की परत पर सबसे अधिक पड़ता है, क्योंकि ये डेढ़ सौ से ढाई सौ सालों तक भी लगातार ऑक्सीजन की फैक्टरी के तौर पर काम करते रहते हैं।





मुख्य चौराहों के आसपास लगाई त्रिवेणी

डॉ. सुरेश कुमार ने ज्यादातर त्रिवेणी मुख्य चौराहों के नजदीक लगाई हैं। ऐसा इसलिए कि इन जगहों पर दिनभर में ज्यादा लोग जुटते हैं। उन्हें तेज धूप से बचने के लिए छांव मिल सके और बैठने के लिए सुकून भरा माहौल। सुरेश ने सांगवान चौक, तोशाम में बवानीखेड़ा रोड, बवानीोड़ा रोड हनुमान मंदिर के समीप और सांगवान पुलिस चौकी के सामने त्रिवेणी लगाई हैं। इसके अलावा धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थलों पर भी त्रिवेणी लगाई हैं। वे अपने खर्च पर ही त्रिवेणी लाते हैं और लगाते हैं, न कोई संगठन है न किसी दूसरे से कोई मदद ले रहे हैं।
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खुद की गाड़ी में लगा डाला इरिगेशन टैंक

डॉ. सुरेश कुमार ने त्रिवेणी लगाने के बाद इनके रखरखाव का जिम्मा भी खुद ही संभाला है। सुरेश ने अपनी गाड़ी की डिग्गी में पीछे 25-25 लीटर पानी के तीन प्लास्टिक ड्रम रखे हैं। ये इरिगेशन टैंक त्रिवेणी को सिंचित करने में इस्तेमाल किए जाते हैं। सुरेश जिस भी रूट पर रोजाना आते-जाते हैं, अधिकांश लगाई गई त्रिवेणी को खुद ही सिंचित करते हैं। एक बार त्रिवेणी अपनी जड़े मजबूत करती हैं तो फिर उन्हें सिंचित करने की भी जरूरत नहीं होती।
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