मुंढाल (भिवानी)। हिसार में हुए तिहरे हत्याकांड से गांव धनाना प्रथम में मातम छाया है। गांव धनाना प्रथम के श्मशान घाट में रविवार देर रात करीब साढ़े 11 बजे बहन और दो भाइयों की चिताएं जलीं। ये देखकर हर कोई दुखी और आक्रोश से भर उठा था। दो भाई मंजीत और जितेश के साथ बहन सुमन को चचेरे भाइयों ने मुखाग्नि दी। तीन बच्चों को खोकर बुजुर्ग राजेंद्र सदमे में थे।
हिसार के कृष्णा नगर में रविवार की सुबह राकेश पंडित ने पत्नी और दो सालों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस वारदात की जानकारी मिलते ही गांव धनाना प्रथम निवासी राजेंद्र के परिवार में कोहराम मच गया था। राजेंद्र अपनी बेटी सुमन और दो बेटों मंजीत और जितेश की हत्या की जानकारी मिलते ही हिसार पहुंच गया था। पुलिस ने रविवार देर रात करीब साढ़े नौ बजे तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया था। रात करीब पौने 11 बजे परिजन शवों को लेकर घर पहुंचे थे। एक बेटी और दो जवान लड़कों के शवों के साथ परिवार की रात कैसे कटेगी, यह सोचकर गांव के मौजिज लोगों ने देर रात को ही तीनों का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट में कराने का निर्णय लिया। इसके बाद श्मशान घाट में अंतिम संस्कार की तैयारी हुई और रात साढ़े 11 बजे तीनों का अंतिम संस्कार कर दिया। हिंदू मान्यता के अनुसार शाम ढलने के बाद अंतिम संस्कार नहीं किया जाता है, लेकिन ये घटना इतनी हृदय विदारक थी कि गांव वालों को पहली बार गांव के श्मशान घाट में रात साढ़े 11 बजे एक साथ तीन चिताओं को अपनी आंखों से जलता हुआ देखना पड़ा।
गांव धनाना में अंतिम संस्कार के लिए सुमन के ससुराल पक्ष से कोई नहीं पहुंचा। वहीं सोमवार को गांव में चूल्हा नहीं जला। ग्रामीण भी इस दर्दनाक घटना की चर्चा कर दुखी थे कि एक ही झटके में हंसता खेलता परिवार उजड़ गया। राजेंद्र के परिवार में अब मंजीत का तीन साल का बेटा, मंजीत की पत्नी, राजेंद्र की पत्नी बचे हैं। जबकि मृतक सुमन और दो भाइयों की एक और बहन शादीशुदा है। अब राजेंद्र के कंधों पर ही परिवार की जिम्मेदारी आ गई है। राजेंद्र से उसके बुढ़ापे के सहारा बनने वाले दोनों बेटे छिन गए हैं वहीं बेटी भी हमेशा के लिए अलविदा हो गई है। सोमवार को शोक संतृप्त परिवार को ढांढस बंधाने भी ग्रामीणों का तांता लगा रहा।