भिवानी। आयुष्मान की बकाया राशि भुगतान नहीं होने से नाराज निजी अस्पताल संचालकों ने मंगलवार को आईएमए की राज्य कार्यकारिणी के आह्वान पर मरीजों का उपचार बंद रखा। इस दौरान जिले के करीब 41 निजी अस्पतालों में आयुष्मान पैनल पर मरीजों को दाखिल नहीं किया गया, न ही उन्हें उपचार मिला।
निजी अस्पताल संचालकों ने कहा कि सरकार लंबे अर्से से आंशिक भुगतान कर रही हैं, जबकि निजी अस्पताल गुणवत्ता परक चिकित्सा सुविधा मरीजों को दे रहे हैं। ऐसे में कब तक वे बिना भुगतान के मरीजों को आयुष्मान पैनल के तहत उपचार दे पाएंगे। हालांकि आईएमए के आह्वान पर मंगलवार को हड़ताल के दौरान अस्पतालों के बाहर कोई नोटिस भी नहीं लगा था। इसकी वजह से मरीजों को भी परेशानी झेलनी पड़ी।
भिवानी जिले में आयुष्मान पैनल पर करीब 79 निजी अस्पताल हैं। इनमें रोजाना ही करीब एक हजार से अधिक मरीजों की ओपीडी रहती है। इसमें करीब 70 से 80 फीसदी मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड बने होते हैं। मंगलवार को भी 41 निजी अस्पतालों में मरीजों को आयुष्मान पैनल के तहत उपचार नहीं मिला न ही उन्हें दाखिल किया गया। इसकी वजह से मरीजों को काफी दिक्कतें झेलनी पड़ी।
कई मरीज तो उपचार नहीं मिलने पर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भी चक्कर लगाते रहे। वहीं आईएमए के पदाधिकारियों की भी राज्य कार्यकारिणी की उच्चाधिकारियों के साथ चल रही बातचीत पर ही निगाहें टिकी रही।
किसी अस्पताल का 50 लाख तो किसी का एक करोड़ से अधिक बकाया
पिछले काफी अर्से से आयुष्मान पैनल के तहत उपचार देने वाले निजी अस्पतालों को भुगतान नहीं हुआ है। कई अस्पताल तो ऐसे हैं, जिनके अंदर रोजाना ही आयुष्मान पैनल के तहत आने वाले मरीजों के बड़े ऑपरेशन किए जाते हैं। ऐसे में किसी निजी अस्पताल का 50 लाख तो किसी का एक करोड़ से अधिक का बकाया बिलों का भुगतान भी अटका हुआ है। ऐसे में ये निजी अस्पताल अब आयुष्मान के मरीजों के उपचार को कम अहमियत देने लगे हैं, क्योंकि पहले से ही इतना ज्यादा बकाया है, उसे हासिल करना ही मुश्किल हो रहा है।
आयुष्मान तो बना है, लेकिन नहीं मिल रहा उपचार
मेरा आयुष्मान कार्ड बना हुआ है। लेकिन उपचार नहीं मिल रहा है। कई अस्पतालों में गए, सभी कहते हैं हम ये सुविधा नहीं दे सकते, इसकी वजह पहले का भुगतान अटका होना बताया जा रहा है। पिता का पत्थरी का ऑपरेशन कराना था, क्योंकि काफी दिनों से तकलीफ झेल रहे हैं।
-सुरेंद्र कुमार दांग खुर्द निवासी।
मेरे परिवार का आयुष्मान कार्ड बना है। मुझे परिवार सदस्य का चेकअप कराने पर पता चला कि उसे बीमारी का ऑपरेशन कराना पड़ेगा। हमने आयुष्मान कार्ड होने की बात कही, लेकिन अस्पताल संचालक ने इस पर उपचार से इंकार कर दिया। मंगलवार को कई अस्पतालों में गए लेकिन सभी ने हड़ताल होने की बात कही।
- विवेक बवानीखेड़ा निवासी।
आयुष्मान पैनल पर रहने वाले निजी अस्पतालों को काफी अर्से से सरकार की तरफ से भुगतान नहीं किया गया है। इसके अलावा सरकार बिलों के भुगतान में भी काफी कटौती कर रही है। इसके अलावा भी निजी अस्पताल संचालकों की कई मांग मुद्दे हैं, जिनको लेकर आईएमए राज्य कार्यकारिणी के साथ बातचीत चल रही है। राज्य कार्यकारिणी के निर्देश अनुसार ही निजी अस्पताल आगे की रणनीति बनाएंगे।
- डॉ सुशील धमीजा, आईएमए के सदस्य।