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Bhiwani News: ईएनटी का तबादला, बाल रोग विशेषज्ञ गई छुट्टी पर, भटक रहे मरीज

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नागरिक अस्पताल की ओपीडी में खाली पड़ा ईएनटी चिकित्सक कक्ष। संवाद - फोटो : Bhiwani
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भिवानी। लंबे समय से चिकित्सकों की कमी झेल रहे नागरिक अस्पताल में व्यवस्था सुधर नहीं रही। पिछले दिनों अस्पताल को ईएनटी विशेषज्ञ मिला था, जिसका भी अब तबादला हो गया है। जिले में महज एक बाल रोग विशेषज्ञ है, जोकि दो माह की चाइल्ड केयर लीव पर गई है। जबकि अस्पताल में न्यूरो सर्जन का पद तो लंबे समय से खाली पड़ा है।
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ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. बिजेंद्र सिंह का करीब एक साल पहले तबादला जींद हो गया था। इसके बाद पिछले माह डॉ. रूपेंद्र सैनी की सप्ताह में तीन दिन तक डेपुटेशन पर ड्यूटी लगाई थी और अब उनका भी तबादला हो गया है। ऐसे में ईएनटी विशेषज्ञ की कुर्सी पर महज 15 से 20 दिन ही चिकित्सक बैठ पाए। कान, नाक और गला से संबंधित बीमारियों के रोजाना औसतन 80 से 90 मरीज आ रहे है। जबकि बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में भी 180 से 200 मरीज आ रहे हैं। सर्दी के सीजन में बच्चों में बीमारियों का खतरा अधिक रहता है। जिसके कारण बाल ओपीडी में काफी भीड़ रहती है।
मेडिकल ऑफिसर के जिम्मे बाल ओपीडी
अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ कक्ष में मेडिकल ऑफिसर ही ड्यूटी दे रहे हैं। इनके कंधों पर ओपीडी और नीकू वार्ड की जिम्मेदारी है। अस्पताल में विशेषज्ञ नहीं होने के कारण बच्चे की थोड़ी सी भी हालत बिगड़ने पर उन्हें पीजीआई रोहतक रेफर कर रहे हैं। वहीं, कुछ परिजन अपने बच्चों को मजबूरी में निजी अस्पतालों में लेकर जा रहे हैं, जहां ओपीडी की 200 से 400 रुपये और दवाइयों के 800 से 1000 रुपये चुका रहे हैं। वहीं अगर बच्चे को अस्पताल में दाखिल करना पड़ता है तो दो दिन का 15 से 20 हजार रुपये खर्च आ रहा है।
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चिकित्सकों के 27, स्टाफ नर्स के 32 पद खाली
नागरिक अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 1200 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। अस्पताल में चिकित्सकों के 74 में से 27 पद खाली हैं, जिनमें एसएमओ के छह और मेडिकल ऑफिसर के 21 पद शामिल हैं। वहीं, स्टाफ नर्स के भी 32 पद खाली हैं। अस्पताल में न्यूरो सर्जन का पद लंबे समय से खाली पड़ा है, जबकि बाल रोग विशेषज्ञ, त्वचा रोग विशेषज्ञ, मनोरोग विशेषज्ञ भी महज एक-एक है। चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को पीजीआई रेफर करना पड़ रहा है
नागरिक अस्पताल में स्टाफ की स्थिति
पद स्वीकृत कार्यरत खाली
एसएमओ 08 02 06
एमओ 66 45 21
मेटरन 01 00 01
एसिस्टेंट 02 00 02
नर्सिंग सिस्टर 14 07 07
स्टाफ नर्स 143 111 32
एलटी 47 20 27
सहायक 27 14 13
क्लर्क 10 06 04
आधे से अधिक दवाइयां भी हुई खत्म
नागरिक अस्पताल में दवाइयों को भी टोटा हो गया है। मजबूरन मरीजों को महंगे दामों पर बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही है। नागरिक अस्पताल में गैस, बीपी, मनोरोग, दर्द की जेल, आंखों सहित बच्चों को बुखार में पीने के लिए देने वाली दवा नहीं है। अस्पताल में सेफेक्सीम टैबलेट, ओफ्लोक्सासिन टैबलेट, मेट्रोनिडाजोल टैबलेट, सिल्वर सल्फाडाइजिन क्रीम, डाइक्लोफिनेक जैल, आइबुप्रोफेन टैबलेट, सिप्रोफ्लोक्सासिन आई ड्रॉप, ओमेप्राजोल कैप्सूल, रैनिटिडिन टेबलेट, एंटी एलर्जी क्रीम, कफ सिरप, सहित आधे से अधिक तरह की दवाइयां नहीं हैं। अस्पताल में सांस के रोगियों को लिए इनहेलर तक नहीं है।
एक्स-रे में आठ में से छह पद खाली
अस्पताल में मरीजों के टेस्ट करने के लिए महज एक एक्स-रे मशीन है, जिस पर सरकारी नियमानुसार 50 से 60 एक्स-रे करने होते हैं। इस मशीन पर रोजाना 200 से अधिक एक्स-रे हो रहे हैं। एक्स-रे करने के लिए आठ रेडियोग्राफर की पोस्ट हैं जिन पर सिर्फ दो रेडियोग्राफर नियुक्त हैं। पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण एक्सरे की सुविधा सिर्फ ओपीडी टाइमिंग में है। इसके बाद मरीजों को निजी लैब में अपनी जेब कटवानी पड़ रही है।
अस्पताल में रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों सहित मेडिकल ऑफिसर के पद खाली है। जिन पर नियुक्ति के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र लिख चुके हैं। अब एनएचएम के तहत नए चिकित्सकों की भर्ती की उम्मीद है, जिसमें नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की संख्या में इजाफा होगा।
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- डॉ. एडविन, प्रधान चिकित्सा अधिकारी।
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