शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए एक सौ जवान तैनात किए गए हैं। इसके बावजूद शहर में जाम ही जाम लग रहे हैं। हालत यह है कि शहर के दो मुख्य चौराहों को तो दोराहा और तिराहा बनाया हुआ है। जाम से लोग परेशान हैं।
शहर का ट्रैफिक और सभी मुख्य मार्गों पर लगता जाम शहर वासियों के लिए परेशानी बन गया है। शहर के लगभग सभी मुख्य मार्गों और मुख्य चौक-चौराहों पर दिनभर जाम के हालात रहते है। आमजन घंटों जाम में फंसे रहते है। शहर में जगह-जगह ट्रैफिक पुलिस तैनात किए गए है मगर अधिकतर नाकों पर पुलिस ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने की बजाए वाहनों के चालान काटने में ही व्यस्त नजर आती है। ट्रैफिक पुलिस ने ट्रैफिक व्यवस्था बनाने के महम गेट चौक को दोराहा बना दिया गया है। घंटाघर चौक को भी पिछले दिनों चौराहे से तिराहा बना दिया गया। सबसे ज्यादा समस्या सोमवार को होती है। इसके अलावा स्कूल-कॉलोजों की छुट्टी के समय।
पुलिस चालान काटने में व्यस्त, कौन करे ट्रैफिक कंट्रोल
शहर के मुख्य चौक-चौराहों पर पुलिस वाहनों के चालान काटती तो नजर आ जाएगी लेकिन ट्रैफिक कंट्रोल करती शायद ही कभी दिखे। ट्रैफिक पुलिस के कर्मचारी और अधिकारी चौक पर कुर्सी पर बैठे कागजात जांच करते मिलेंगे। ट्रैफिक कंट्रोल में जरा भी रुचि नहीं होती है। ट्रैफिक कंट्रोल करने में जुटे पुलिस के जवान हर रोज औसतन करीब 220 चालान काटे जा रहे हैं।
क्यों लग रहा जाम
शहर में जाम के अनेक कारण हैं। जिनमें सबसे मुख्य है अतिक्रमण। शहर के सभी मुख्य मार्गों पर अतिक्रमण है। 22-22 फुट चौड़े मार्ग पर भी सिमट कर अब 10 से 15 फुट के रह गए हैं। मार्ग के दोनों ओर लोगों खासकर दुकानदारों ने अतिक्रमण कर रखी है। शहर के नया बाजार मार्ग,घंटाघर से सराय चौपटा, किरोड़ीमल मंदिर क्षेद्ध, हांसी गेट से घंटाघर चौक, हांसी गेट क्षेत्र में पूरे फुटपाथ व काफी हद तक सड़क पर अतिक्रमण है। मजबूरन लोग सड़क पर वाहन खड़े कर रहे है। अनेक दुकानदार तो अपनी दुकानों के बाहर स्टॉल या रेहड़ी लगाने के बदले किराया वसूल रहे है।
जाम का दूसरा मुख्य कारण है पार्किंग व्यवस्था की कमी। शहर में कही भी किसी भी बाजार में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। मजबूरन लोग सड़क पर वाहन खड़े कर रहे है और जाम लग रहे है। लावारिस पशु भी जाम का एक बड़ा कारण है। अक्सर सड़क के बीच सांड़ लड़ने लगते है और पूरा मार्ग जाम हो जाता है। ये लावारिस पशु सड़क पर ही बैठते है। इन मुख्य समस्याओं का समाधान हो जाए तो जाम की समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है।
फेल साबित हुए सारे प्रयास
शहर में ट्रैफिक व्यवस्था से निपटने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने पिछले पांच-छह वर्षों में अनेक कदम उठाए मगर सारे फेल ही साबित हुए। शहर में करीब 90 लाख की लागत से चार जगह ट्रैफिक लाइटें लगाई गई मगर सप्ताहभर भी नहीं जली और खराब हो गई। अब इन्हें बदला जाना है मगर नप की आर्थिक हालत खराब है। नेहरू पार्क के पास पार्किंग व्यवस्था की गई, मगर वहां कोई भी वाहन ही खड़ा नहीं करता।