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भिवानी ही नहीं, फतेहाबाद, महम, बागपत में भी फर्जी आरसी पर चल रहे ट्रैक्टर

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तोशाम एसडीएम कार्यालय से फतेहाबाद, तोशाम, बागपत तक के किसानों के नाम से ट्रैक्टर की फर्जी आरसी बनाई गई। 38 आरसी फर्जी बनाई गई है। धोखाधड़ी का मामला उजागर हुआ तो एसडीएम कार्यालय की ओर से पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने अज्ञात की शिकायत पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। जांच के लिए पुलिस एसडीएम कार्यालय पहुंची और रिकार्ड की जांच की। प्राथमिक जांच में सामने आया कि फतेहाबाद, महम यहां तक कि यूपी के बागपत में भी यहां बनी फर्जी आरसी से ट्रैक्टर चल रहे हैं।
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उल्लेखनीय है कि 21 अगस्त 2019 को 38 ट्रैक्टरों की फर्जी आरसी बनाई गई थी। जिसमें फर्जी कागजातों के सहारे छुट्टी के दिन इस कार्य को किया गया था। मामला सबके सामने आने के भय से 79 दिन बाद सभी आरसी को रद्द कर दिया गया। तोशाम एसडीएम ने डीसी को पत्र लिखकर तोशाम एसडीएम कार्यालय व पंजीकरण अधिकारी कार्यालय का सोशल ऑडिट करवाने की मांग की है। डीसी को लिखे गए पत्र के अनुसार 21 अगस्त 2019 को 38 नए ट्रैक्टरों की आरसी फीस जमा करने के बाद उनका चालान बैंक में जमा करवाया गया। पत्र में इस बात का भी उल्लेख है कि रजिस्ट्रेशन के लिए जिन कागजातों का प्रयोग किया गया है वे सभी फर्जी थे। पुलिस ने जैनावास निवासी सतबीर की शिकायत पर अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है।
तीन आरसी नहीं हुई डिलीट : सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 38 फर्जी आरसी बनाई गई थी। जो ऑनलाइन हुई। मामला सामने आने के बाद आनन-फानन में सभी डिलीट कर दी गई। मगर तीन आरसी डिलीट नहीं हुई। इनमें एक महम की थी, जिसकी एनओसी भी जारी कर दी गई और सर्टिफाइड कॉपी भी। इस कारण यह डिलीट नहीं हुई। एक फतेहाबाद में जारी आरसी डिलीट नहीं हुई और तीसरा बागपत में एक ट्रैक्टर का चालान कट गया और चालक ने वह चालान भी भुगतान कर दिया। इस कारण यह आरसी डिलीट नहीं हो पाई।
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ट्रैक्टर है नहीं, किसानों के पास आए बेचे जाने के फोन : तुम्हारे पास ट्रैक्टर है, बेचोगे क्या। इस तरह के फोन जैनावास, अलखपुर के कुछ किसानों के पास आए। जिसके बाद वे भी हैरान हो गए कि उनके पास ट्रैक्टर है, नहीं फिर कैसे ये फोन आ रहे हैं। पुलिस को दी शिकायत में जैनावास वासी सतबीर ने बताया कि अगस्त में उसके लड़के अनिल के पास फोन आया, जिसने अपने आपको रिढाण वासी मनीष बताया। उसने बताया कि सतबीर के नाम ट्रैक्टर है, उसे बेचना चाहते हो क्या। बेटे अनिल ने बताया कि सतबीर के नाम से कोई ट्रैक्टर नहीं है। सतबीर ने बताया कि इस फोन के बाद हमने अपने स्तर पर एसडीएम कार्यालय में जांच करवाई तो उसके नाम ट्रैक्टर नंबर एचआर 48सी 7502 सोनालिका पंजीकृत मिला। किसी ने उसके फर्जी कागजात और फर्जी हस्ताक्षर के सहारे यह सब किया है।
पुलिस ने की जांच, सहमे रहे कर्मचारी : तोशाम एसडीएम कार्यालय में छुट्टी के दिन बनाए गए जाली आरसी के मामले में वीरवार को पुलिस ने एसडीएम कार्यालय में पहुंचकर जांच शुरू की। वीरवार को सारा दिन एसडीएम कार्यालय में फर्जी आरसी बनाए जाने से कर्मचारी सहमे-सहमे नजर आए। पुलिस हर पहलु से जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार इन ट्रैक्टरों की आरसी बनवाने के लिए एक व्यक्ति कागजात लेकर एसडीएम कार्यालय में आया था, उसने कहा था की वह एजेंसी से है और ये कागजात जमा किए जाएं। वह कागजात देकर वापस चला गया था। उसके बाद यह कागजात बनाए गए हैं। छुट्टी के दिन कागजात बनाना संदेह के घेरे में हैं।
आरसी बनाने में प्रयुक्त बिल है फर्जी : सूत्रों के अनुसार ट्रैक्टर की आरसी बनाने के लिए जिन बिलों का प्रयोग किया गया है वे फर्जी हैं और जिस फर्म के नाम से बिल कटे हैं, वो फर्म ही नहीं है। नए वाहनों के कागजात बनवाने के लिए वाहन मालिक को एसडीएम कार्यालय में नहीं आना पड़ता। वाहन लेते समय ही उसकी फीस एजेंसी में ही जमा हो जाती है। एजेंसी से बाद में आरसी बनने के लिए कागजात एसडीएम कार्यालय में जमा होते हैं। कागजात जमा करते समय एमआरसी को कागजात चैक कर फॉरवर्ड करने होते हैं और उसके बाद कंप्यूटर में आरसी बनाने के लिए फीड किए जाते हैं। कंप्यूटर में फीड होने के बाद आरसी बनती हैं।
38 ट्रैक्टर की फर्जी आरसी की खबर एसडीएम कार्यालय से आज ही प्राप्त हुई है। इससे पहले छह सितंबर को एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें एक आरसी फर्जी होने की सूचना दी गई थी। वह शिकायत थाना तोशाम को मार्क कर दी गई थी। वहां से रिपोर्ट पेंडिंग थी। रिपोर्ट प्राप्त होने पर आज मुकदमा दर्ज कर दिया गया है। इसमें अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है।
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- वरुण सिंगला, एसीपी
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