टीआईटी मिल से जुड़े मजदूरों के लिए राहत भरी खबर है। 95 साल पुरानी मिल की तालाबंदी पर शासन ने रोक लगा दी है। सोमवार को इस आशय का पत्र श्रम विभाग को प्राप्त हो गया।
एडिशनल चीफ सेक्रेटरी की ओर से जारी पत्र में मिल को बंद करने से रोक दिया गया है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि मिल का संचालन कैसे होगा। फिलहाल शासन के इस निर्देश से सैकड़ों मजदूर परिवारों में उम्मीद की किरण जगी है।
बीते 19 अगस्त को प्रबंधन ने काम की अनुपब्लधता का हवाला देकर टीआईटी मिल पर वर्क सस्पेंड करने की नोटिस चस्पा कर दी थी। इसके साथ ही घाटे की दलील देकर प्रबंधन ने मिल को स्थायी रूप से बंद करने की अनुमति भी मांगी थी। मिल के इस तरह अचानक बंद होने से उस पर आश्रित तीन सौ से अधिक मजदूरों की आजीविका का सहारा छिन गया है।
मजदूर परिवार के सामने रोजी-रोटी की गंभीर समस्या बनी हुई है। विभिन्न पहलुओं को देखते हुए एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने मिल को बंद करने पर रोक लगा दी है। इस फैसले से जहां मिल प्रबंधन को जोरदार झटका लगा है, वहीं मजदूर तबके में आशा की किरण जग गई है।
शहर में घूमकर मजदूरों ने मांगा जन सहयोग
शहर की पहचान 95 वर्ष पुरानी टीआईटी मिल बचाने के लिए श्रमिक संगठनों का जन आंदोलन सोमवार से शुरू हो गया। टीआईटी बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले सैकड़ों मजदूरों ने शहर में जुलूस निकाल कर जन सहयोग मांगा। नुक्कड़ सभाओं के जरिए लोगों से बढ़-चढ़ कर इस अभियान में हिस्सा लेने का आह्वान किया।
शाम 6 बजे घंटा घर चौक से शुरू हुआ जुलूस सराय चौपटा, वैश्य स्कूल होते हुए दिनोद गेट पहुंचा। जुलूस में शामिल मजदूर मिल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। व्यापारियों व आम लोगों से मिलकर मिल बचाने की मुहिम में तन-मन-धन से सहयोग की अपील करते रहे। दिनोद गेट व कृष्णा कॉलोनी चौक पर सभा हुई। इसमें वक्ताओं ने मिल प्रबंधन पर सैकड़ों मजदूरों की आजीविका छीनने का आरोप लगाया।
कहा कि घाटे के झूठे दावों के आधार पर दशकों पुराने मिल को बंद करने की साजिश की जा रही है। इसे सफल नहीं होने दिया जाएगा। आंदोलन में जन संघर्ष समिति के ओमप्रकाश, सीटू के जिला प्रधान विनोद कुमार, करतार ग्रेवाल, रामचन्द्र यादव, भट्ठा मजदूर यूनियन के भीम सिंह, टीआईटी कर्मचारी संघ के महासचिव लीलूराम कादयान, अनिल, विनोद आदि शामिल रहे।