अपने माता-पिता के साथ मुक्केबाज प्रीति पंवार।
भिवानी। आज देशभर में राष्ट्रीय माता-पिता दिवस मनाया जा रहा है। माता-पिता की अहमियत को महसूस करने के लिए इस दिन को हर साल मनाया जाता है। हालांकि आज के समय में लड़कियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ चुकी हैं लेकिन अब भी ऐसे माता-पिता हैं जो अपनी बेटियों को घर से बाहर तक नहीं निकलने देते। मगर कुछ माता-पिता ऐसे भी हैं जो अपनी बेटियों के सपनों को खुले आसमान में उड़ान भरने देते हैं और उनकी हर तरीके से मदद करते हैं ताकि वह अपनी प्रतिभा के बल पर अपने देश का नाम रोशन कर सकें।
आज हम ऐसे ही बेटियों के माता-पिताओं की सफलता बता रहे हैं, जिन्होंने अपनी बेटियों को खेल के क्षेत्र में इतना आगे बढ़ाया कि आज वह पेरिस में हो रहे ओलंपिक में हिस्सा लेकर देश को गौरवान्वित कर रहीं हैं। एक माता-पिता ऐसे भी हैं जिन्होंने बेहद कम उम्र में अपनी बेटी के आईएएस बनने के सपने को साकार करवाया है। बेटी ने अपना सपना माता-पिता को बताया और उन्होंने इस सपने को पूरा करने के लिए हर वक्त साथ दिया।
प्रीति को माता-पिता ने दिया हौसला तो चाचा ने सिखाए मुक्केबाजी के हुनर
भिवानी की बेटी बॉक्सर प्रीति पंवार पेरिस में हो रहे ओलंपिक में पदक जीतने के लिए गईं हैं। प्रीति के पिता सोमवीर और उनकी माता सालीन देवी ने अपनी बेटी की कला को पहचान और खेल में आगे बढ़ाने के लिए उनका साथ दिया। उनके चाचा राजा विनोद उनके कोच भी हैं। उन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचान बॉक्सिंग में कोचिंग देनी शुरू कर दी।
प्रीति के पिता सोमवीर ने बताया कि विनोद ने बहुत मेहनत की है जिनकी बदौलत आज प्रीति ओलंपिक में खेलने के लिए पहुंची हैं। आज उनके माता-पिता एवं उनके कोच को प्रीति पर बहुत गर्व महसूस हो रहा है। इन्हें उम्मीद है कि वह ओलंपिक में पदक जीत कर देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकाएंगी। ओलंपिक में प्रीति के मुकाबले से बॉक्सिंग की शुरुआत होगी। प्रीति का मुकाबला शनिवार रात 12 बजे 54 किग्रा भार वर्ग में वियतनाम की थी किम आ वो के साथ होगा।
जैस्मिन लंबोरिया के चाचा संदीप ने निभाई कोच की भूमिका तो साकार हुआ माता-पिता का सपना
मुक्केबाज जैस्मिन लंबोरिया ओलंपिक में बॉक्सिंग में अपना दम दिखाने के लिए गईं हैं। उनके पिता जयवीर सिंह और उनकी माता जोगिंदर ने जैस्मिन के मुक्केबाज बनने के सपने को बखूबी साकार किया। उनके चाचा एवं उनके कोच संदीप लंबोरिया का भी सपना था कि जैस्मिन अंतरराष्ट्रीय स्तर की मुक्केबाज बनें और ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करें। जैस्मिन कई बड़े टूर्नामेंट जीत चुकी हैं और ओलंपिक में भी पदक लेकर आएंगी। जैस्मिन का मुकाबला 30 जुलाई को टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक विजेता फिलीपींस की मुक्केबाज नेस्टी पेटेसियो के साथ होगा।
महज 21 साल की उम्र में बेटी नेहा चौधरी को बनाया आईएएस
नेहा चौधरी ने महज 21 वर्ष की आयु में पहले प्रयास में ही आईएएस की परीक्षा पास की। उनके पिता मुनेश कुमार और उनकी माता मुकेश ने पूरा साथ दिया। उनके पिता मुनेश ने बचपन से ही यह भांप लिया था कि उनकी बेटी बड़ी अधिकारी बनेगी। इसलिए उन्होंने स्कूल भेजने से पहले ही बेटी को घर में ही पढ़ाया और स्कूल में पहली दो कक्षा छोड़कर सीधे तीसरी कक्षा में दाखिला करवाया। उस दौरान भी वह अपनी कक्षा में सबसे होशियार छात्रा थी। नेहा ने पहले प्रयास में ही आईएएस बनकर अपना और परिजनों का सपना पूरा किया। इससे नेहा समेत सभी परिजनों को बहुत गर्व है। नेहा धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में भी हमेशा आगे रहीं हैं।