अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ।
भिवानी। हर कोई जीवन में अपना लक्ष्य लेकर आगे बढ़ता है, लेकिन ये जरूरी नहीं की शुरुआत में ही वो लक्ष्य हमें आसानी से मिल जाए। उसे पाने के लिए हमेशा अथक प्रयास करते रहना बहुत जरूरी है। यह कहना है पशु चिकित्सक से आईएएस बनने तक का सफर तय करने वाले भिवानी के अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ का।
डॉ. हरीश का कहना है कि आईएएस का मतलब आई एम द सोल्यूशन यानी मैं समाधान हूं। एक आईएएस के पास हर तरह की समस्याएं आती हैं, लेकिन ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका समाधान नहीं हो सकता। इसलिए आईएएस की तैयारी करने वाले युवाओं को यह समझना बहुत जरूरी है कि वे अपनी क्षमता और कमियां दोनों का आकलन कर समय का सदुपयोग कर इंटरव्यू की बेहतरीन तैयारी करें। अपना व्यक्तित्व और मजबूत बनाएं। आईएएस के सामने जब भी कोई समस्या आती है तो आप उसका कैसे समाधान करेंगे यह बात काफी मायने रखती हैं। 20 साल तक पशु चिकित्सक की नौकरी करने वाले डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने पहले तीन बार एचसीएस का इंटरव्यू तक का सफर भी तय किया, लेकिन सफलता के नजदीक पहुंचकर भी लक्ष्य हासिल नहीं कर सके। उनके मन में इससे भी बड़ा कुछ कर गुजरने की ललक जगी तो नॉन स्टेट सिविल सर्विसेज में अपना भाग्य आजमाया। नॉन स्टेट सिविल सर्विसेज 2016 में प्रथम प्रयास में ही उन्होंने सफलता हासिल की।
डॉ. हरीश कुमार ने अपनी सफलता के पीछे अपना आदर्श पिता को माना। मूल रूप से हिसार के गांव गढ़ी निवासी पिता मुकंदलाल वशिष्ठ ने पशुपालन विभाग में बतौर वीएलडीए अपनी सेवाएं दीं। माता माया देवी गृहिणी हैं। चार भाई-बहनों में डॉ. हरीश सबसे बड़े हैं। डॉ. हरीश ने पांचवीं तक की पढ़ाई गांव के ही सरकारी स्कूल से की। इसके बाद उन्होंने छठी कक्षा में जवाहर नवोदय विद्यालय पाबड़ा में दाखिला लिया। यहां से बारहवीं तक की शिक्षा पूरी करने के उपरांत हिसार के चौ. चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और फिर लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं आयुर्विज्ञान यूनिवर्सिटी से मेडिसन में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। डॉ. हरीश पशु विभाग में 2001 में पशु चिकित्सक की नौकरी लगे। उनकी पहली नियुक्ति हिसार जिले के गांव सेखपुरा में हुई। जहां उन्होंने बतौर पशु चिकित्सक लगातार 13 साल तक कार्य किया। इसके बाद उन्होंने हिसार जिले के ही गांव मंगाली पशु अस्पताल में पशु चिकित्सक के तौर पर सात साल तक अपनी सेवाएं दीं। अपने कार्य की व्यस्तता के बावजूद उनके अंदर आईएएस बनने की ललक कम नहीं हुई। उन्होंने नॉन स्टेट सिविल सर्विसेज के लिए 2016 में पहली बार प्रयास किया, उनका ये प्रयास सफल हुआ तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं था। क्योंकि एक साधारण परिवार के सीमित संसाधनों के बावजूद सिविल सर्विस की परीक्षा पास करना इलाके के लिए ही बड़ी बात थी। इससे पहले डॉ. हरीश तीन बार एचसीएस के इंटरव्यू तक भी पहुंचे थे। संवाद
छोटा भाई साफ्टवेयर इंजीनियर, दोनों बहनें हैं शिक्षिका
डॉ. हरीश का छोटा भाई नकुल वशिष्ठ नोएडा में साफ्टवेयर इंजीनियर है, जबकि उनकी दो छोटी बहनें सुमन वरिष्ठ और रिना वशिष्ठ शिक्षा विभाग में बतौर पीजीटी अंग्रेजी सेवाएं दे रही हैं। डॉ. हरीश की पत्नी अनु वशिष्ठ भी शिक्षा विभाग में बतौर पीजीटी अंग्रेजी अपनी सेवाएं दे रही हैं। बेटी आदिति 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रही है, जबकि बेटा देव वशिष्ठ दसवीं में पढ़ रहा है।