भिवानी। सौतेले पिता ने नशे में मासूम बच्चे का सौदा कर उसे ऐसे नर्क में धकेल दिया जहां उसे हर रोज यातनाएं झेलनी पड़ीं। बच्चे का तीन बार सौदा किया गया। बाल कल्याण समिति ने एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी के घर से इस बच्चे को रेस्क्यू किया। वीरवार को काउंसिलिंग की गई तो उसकी आपबीती ने सबको झकझोर दिया। समिति ने शहर थाना पुलिस को पत्र लिखकर इस मामले की जांच और प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
काउंसिलिंग के दौरान बच्चे ने बताया कि उसे घर के अंदर बंधक बनाकर रखा जाता था। उसे अलग-अलग जगह रखा गया। घर का मालिक, उसकी पत्नी और बेटियां जिन्हें वह अपना समझता था सब उसे पीटते थे। बच्चे के शरीर पर चोटों के निशान भी साफ दिख रहे थे। बाल कल्याण समिति के चेयरमैन एडवोकेट प्रदीप तंवर ने बताया कि बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य सुशील वर्मा की शिकायत पर स्टेट क्राइम ब्रांच और समिति ने भिवानी की एक कॉलोनी में रह रहे बहादुरगढ़ ट्रैफिक पुलिस में तैनात कर्मी के घर से इस बच्चे को रेस्क्यू किया था। अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि रोहतक जिले के एक गांव निवासी व्यक्ति ने करीब साढ़े पांच साल पहले बिहार की एक महिला से शादी की थी। शादी से पहले उसके एक लड़का था। बच्चे का आधार कार्ड और जन्म से जुड़ा कोई प्रमाण भी नहीं था। शादी के करीब डेढ़ साल बाद बिहार से लाई गई महिला पति की प्रताड़ना से तंग आकर घर छोड़कर चली गई जिसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कराई गई। इसके बाद नशे के आदी सौतेले पिता ने बच्चे को पड़ोसी गांव के एक व्यक्ति को बेच दिया। उसने एक अन्य व्यक्ति को बेचा। वहां से ट्रैफिक पुलिसकर्मी के घर लाया गया। शहर थाना पुलिस के एसएचओ जरनैल सिंह ने बताया कि प्रकरण की जांच कर रहे हैं। अभी किसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की है। संवाद
बदन पर पिटाई के निशान
बच्चे को जब रेस्क्यू किया गया वह सहमा हुआ था। काउंसिलिंग के बाद कुछ सामान्य हुआ। उसे जिला नागरिक अस्पताल में दाखिल कराया गया क्योंकि शरीर पर पिटाई के निशान हैं। काउंसिलिंग में बच्चे ने उसे हर रोज पीटने की बात कही है। जांच में पता चला है कि बच्चे की मां उसे चार साल पहले छोड़कर चली गई थी।
कौन है बच्चे का सौतेला पिता
बड़ा सवाल यह है कि बच्चा कौन है, इसका सौतेला पिता कौन है और मां अब कहां है? पुलिस जांच में इन सवालों के जवाब तलाशेगी ताकि बच्चे के सौतेले पिता तक पहुंचा जा सके। इसके बाद पूरे मामले की कडि़यां खुलेंगी।
बच्चे के पिता का नाम बदलने का प्रयास
जिला बाल कल्याण समिति के चेयरमैन एडवोकेट प्रदीप के मुताबिक जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर उन्हें बताया है कि बच्चे का एक विद्यालय में दाखिला भी कराया गया है। उसके पिता का नाम भी बदलने का प्रयास किया गया है। इससे पहले बच्चे को दो जगह और लोगों ने रखा। बच्चे के जन्म और उससे जुड़े कोई दस्तावेज नहीं मिले हैं। ऐसे में विद्यालय संचालक से मिलीभगत कर बच्चे के पिता के नाम की जगह अपना नाम दर्ज कराने का प्रयास किया गया है।