दरअसल, वीरवार देर शाम करीब साढ़े सात बजे एक नाबालिग लड़की बाल सेवा आश्रम के गेट पर पहुंची। इसके बाद बाल सेवा आश्रम सदस्यों ने डायल 112 पर इसकी सूचना दी और बाल कल्याण समिति को भी सूचना किया गया। डायल 112 की टीम ने मौके पर पहुंचकर लड़की से बात की तो उसने रोते बिलखते हुए पुलिस को एक कहानी सुनाई। इसमें उसने बताया कि उसके माता-पिता की करीब दो साल पहले एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी, जिसके बाद से ही उसका चाचा और चाची उसकी देखभाल करते हैं।
नाबालिग ने बताया कि वह दसवीं में पढ़ती है। उसने जूई कलां पुलिस थाना क्षेत्र की जगह की रहने वाली बताया। उसने बताया कि उसके चाचा-चाची उसके साथ मारपीट करते हैं। तीन दिन से उसे घर में बंधक बनाया है, उसे स्कूल नहीं जाने दिया जा रहा। लड़की ने आरोप लगाया कि उसके माता-पिता की प्रॉपर्टी उसके नाम हैं, इसलिए उसकी चाची अपने भाई से उसकी जबरन शादी कराना चाहती है। इसलिए वह वीरवार शाम को किसी तरह मौका पाकर घर से भाग आई और एक ऑटो रिक्शा में बैठकर बाल सेवा आश्रम तक पहुंची। उसके पास ऑटो को देने के लिए किराया तक नहीं था। ऑटो वाला उसे बाल सेवा आश्रम के गेट पर छोड़कर चला गया।
पुलिस को इस कहानी पर यकीन होता, इससे पहले उसके आधार कार्ड को देखा तो वह हालु मोहल्ला क्षेत्र का मिला। इसके बाद पुलिस ने बाल कल्याण समिति सदस्य सतेंद्र तंवर से संपर्क साधा। सतेंद्र तंवर ने लड़की से पूछताछ की तो वह अपनी बातों को घुमाती रही और लगातार पुलिस व सदस्यों को गुमराह करती रही। इसी बीच आधार कार्ड के आधार पर टीम ने करीब ढ़ाई घंटे की मशक्कत के बाद लड़की के परिजनों को ढूंढ निकाला। लड़की के परिजन बाल कल्याण समिति कार्यालय पहुंंचे। इसके बाद लड़की की बातों का झूठ सामने आया। परिजनों को सामने पाकर भी लड़की ने उनके साथ घर जाने से साफ इंकार कर दिया। इसके बाद बाल कल्याण समिति सदस्य ने लड़की को बाल सेवा आश्रम भेजने के आदेश किए।
लड़की की काउंसिलिंग करवाई : सतेंद्र तंवर
बाल कल्याण समिति सदस्य सतेंद्र तंवर ने बताया कि शुक्रवार को लड़की की काउंसिलिंग कराई गई है। उसे फिलहाल बाल सेवा आश्रम भेजने के आदेश किए जा चुके हैं। इसके बाद लड़की को बुधवार देर शाम को ही बाल सेवा आश्रम में भेज दिया गया था। लड़की परिजनों के साथ किस वजह से साथ जाना नहीं चाहती, इसका भी काउंसिलिंग के दौरान पता किया जाएगा। नाबालिग लड़की लगातार झूठ बोलकर गुमराह कर रही थी, इसलिए पुलिस और बाल कल्याण समिति को भी निर्णय लेने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।