भिवानी के देवसर धाम में पूजा अर्चना के लिए लगी श्रद्धालुओं की भीड़।
भिवानी। चैत्र नवरात्र की अष्टमी पर कन्या पूजन के लिए शहर के बाजारों में रौनक बढ़ गई है और महिलाएं कंजका पूजन की तैयारियों के तहत खरीदारी में जुटी नजर आईं। नवरात्र के दौरान व्रत संकल्प लेकर नौ दिनों तक माता की आराधना करने वाली महिलाएं अष्टमी पर कंजका पूजन की तैयारियां कर रही हैं।
पूजन से दो दिन पहले ही बाजारों में महिलाओं की भीड़ दिखाई दी। इस दौरान उन्होंने कंजका को भोजन कराने के बाद उपहार स्वरूप देने के लिए उनकी पसंद की वस्तुएं खरीदीं। नवरात्र की अष्टमी पर कंजका पूजन का विशेष महत्व होता है जिसमें महिलाएं अपने घरों पर सात से नौ कन्याओं को भोजन कराती हैं। मंगलवार को शहर के किरोड़ीमल मंदिर बाजार, सराय चौपटा बाजार और घंटाघर बाजार में महिलाओं ने जमकर खरीदारी की, जिसमें बच्चों के लिए सह-शैक्षणिक सामग्री भी शामिल रही। महिलाओं का कहना है कि भेंट स्वरूप ऐसी वस्तुएं दी जानी चाहिए जिनका बच्चे बाद में उपयोग कर सकें। अनुपयोगी वस्तुएं देने का कोई लाभ नहीं होता।
मैं हर बार नवरात्र पर पूरे नौ दिनों तक घर के अंदर घट स्थापना कर माता का विधि-विधान से पूजन करती हूं। मुझे नौ दिनों तक भूख-प्यास का अहसास ही नहीं होता। सुबह से ही मेरी दिनचर्या बदल जाती है। पूजन के बाद दिनभर माता का भजन-कीर्तन और घरेलू काम निपटाने में ही समय निकल जाता है। अष्टमी पर कंजका पूजन का अनुष्ठान इसमें अहम है। उसकी ही तैयारियां कर रही हूं। -सरोज देवी
मेरा ससुराल में चैत्र नवरात्र पर पहली बार व्रत रखने का अवसर है। मैं इसलिए भी उत्साहित हूं कि मुझे अष्टमी पर कंजका पूजन का मौका मिलेगा। इस दिन नौ कन्याओं को भोजन कराया जाएगा। कंजका पूजन के लिए मैंने बाजार से बालिकाओं के दैनिक उपयोग की वस्तुएं खरीदी हैं जिन्हें भोज के बाद भेंट स्वरूप दिया जाएगा। -शीतल
नवरात्र की अष्टमी और नवमी दोनों दिन व्रत अनुष्ठान का विधान है। कुछ महिलाएं अष्टमी पर व्रत पूरा करती हैं, जबकि कुछ नवमी पर कंजका पूजन कराती हैं। ऐसे में मैंने अष्टमी के लिए पूजन सामग्री पहले ही खरीद ली है, क्योंकि उस दिन सुबह भोजन तैयार कर कंजका को विधि-विधान से भोजन कराने में अधिक समय लगता है। -पिंकी