नहरी पानी टेल तक नहीं पहुंचने के कारण गांव उमरावत की जमीन बंजर होने लगी है। किसान सालभर में केवल सरसों की फसल ही ले पा रहे हैं। ऐसे में किसानों के सामने आर्थिक समस्या खड़ी होती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार किसानों के हक में बड़े फैसले ले रही है मगर उमरावत के किसान सिंचाई के पानी के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीणों ने सरकार से जल्द खेतों के पानी की मांग को पूूरा करने की मांग की।
किसान मांगेराम, ओम प्रकाश, रामधारी, भोलूराम, रामनिवास आदि ने बताया कि दादरी डिस्ट्रीब्यूटरी नहर से उनका जुड़ाव है। उनकी नहर जब कच्ची थी तो भरपूर पानी आता था। खेत खलिहान फसलों से लहलहाते थे। नहर के नवीनीकरण पर सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किये मगर अब यहां तक पानी पहुंच ही नहीं रहा है। नहर निर्माण के समय बड़े-बड़े अधिकारी जांच के लिए आए व ग्रामीणों को विश्वास दिलाया कि अब पूरी मात्रा में आएगा मगर हालात दिन-प्रतिदिन खराब होते जा रहे हैं।
नहर में पानी न आने के कारण उनके खेत बंजर होते जा रहे हैं। अधिकतर किसानों ने तो पानी के अभाव में अपनी जमीन तक को बेच दिया है। जिन किसानों ने बैंक से लोन लिया है उसको वो फसल पर चुकता करते लेकिन यहां न तो अच्छी पैदावार है और किसानों की हालत भी माली है। ऐसे में किसान बैंक के कर्ज तले दबे हुए हैं। उन्हें अपनी जमीनें बेचने के अलावा कोई रास्ता दिखाई नहीं देता है।
किसानों ने सिंचाई के लिए पानी कमी का मुद्दा विधायक और मंत्री के सामने भी उठाया था लेकिन हर बार उन्हें समस्या के समाधान का आश्वासन ही मिलता रहा। सिंचाई के लिए पानी आज तक नहीं मिला है। हर बार लोगों को उम्मीद बंधती है और फिर टूट जाती है।
सरपंच दिनेश शर्मा ने बताया कि वे कई बार सिंचाई विभाग के अधिकारियों व भिवानी दौरे के दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल से भी गांव में पानी की समस्या को लेकर मिल चुके है। उन्होंने बताया कि इस बारे में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भी पानी मुहैया करवाने के निर्देश दे दिए थे, लेकिन आज तक उनकी नहर में सिंचाई के योग्य पानी नहीं आया है।