सीडब्ल्यूसी द्वारा रेस्क्यू किए गए बच्चे।
भिवानी। बच्चों के हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए न कि काम का बोझ यह बात जिला बाल कल्याण समिति भिवानी के चेयरमैन अधिवक्ता प्रदीप सिंह तंवर ने कही। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर शुक्रवार को जिला बाल कल्याण समिति ने तीन मासूम बच्चों को बाल मजदूरी के चंगुल से सकुशल उद्धार किया।
इस अभियान में क्राइम ब्रांच से एएसआई मंजीता, एएसआई पवन, एएसआई रामफल, सीडब्ल्यूसी सदस्य सतेंद्र तंवर, नीलम रानी, दिनेश अत्री, लक्ष्मी भारद्वाज तथा डीसीपीओ से सोशल वर्कर रिंकू का विशेष सहयोग रहा। चेयरमैन प्रदीप सिंह तंवर ने कहा कि बच्चे किसी भी राष्ट्र का वास्तविक भविष्य और उसकी नींव होते हैं। उनकी सुरक्षा, शिक्षा और अधिकारों की रक्षा करना सीडब्ल्यूसी की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि बाल श्रम एक सामाजिक अभिशाप है जिसे केवल कानूनी कार्रवाई से नहीं बल्कि समाज की सामूहिक जागरूकता से ही समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यदि आसपास किसी दुकान, होटल, कारखाने या घरेलू कार्य में कोई बच्चा मजदूरी करता हुआ दिखाई दे तो तुरंत इसकी सूचना प्रशासन या सीडब्ल्यूसी को दें ताकि मासूमों को बाल श्रम के चक्रव्यूह से बाहर निकाला जा सके।