शहर में पुरानी पाइप लाइन की वजह से लीकेज और ठप सीवर की समस्या बनी है। कई जगह लाइनों को बदले जाने का एस्टीमेट भी विभागीय अधिकारियों ने तैयार किया है। इससे पूरे शहर के अंदर करीब 45 से 50 किलोमीटर दायरे में पेयजल और सीवरेज की लाइन बदली जानी हैं।
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने शहर में 42 साल पुरानी जर्जरहाल सीवर और पेयजल लाइनों को बदलने का मसौदा तैयार किया था। लेकिन साल भर इस पर अधिकारियों ने होम वर्क किया और मसौदा मुख्यालय को भेजा गया। मगर अब तक इस पर न तो सरकार ने कोई आपत्ति लगाई न ही इसमें बजट की मंजूरी दी है। सबसे अहम बात तो यह है कि शहर में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और नगर परिषद दोनों ही अब शहर में नए सीवरेज और पेयजल लाइनों पर कोई काम भी नहीं करा पा रहे हैं। अमृत प्रथम चरण का काम भी अभी अधूरा पड़ा है। इसके पूरा होने के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सबसे अधिक पानी की लाइनों में लीकेज की वजह से शहरी कॉलोनियों में लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं।
महाग्राम योजना में भी अभी तक नहीं बढ़े आगे कदम, सिर्फ सर्वे तक सिमटा मसौदा
जिले में 25 से अधिक गांवों में महाग्राम योजना के तहत नई सीवर लाइन डाले जाने का मामला आगे बढ़ा है। अधिकारियों की कार्यवाही सिर्फ सर्वे तक ही सिमटी है। हरियाणा सरकार ने इसी साल जिले के बड़े गांवों को महाग्राम योजना में शामिल करते हुए इनके अंदर नई सीवर लाइन डालने और इसके लिए बजट देने का एलान किया था, मगर साल भर महाग्राम योजना में शामिल गांवों में सिर्फ सर्वे का ही काम हो पाया।
अमृत द्वितीय चरण के कार्य की अभी कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। जिन गांवों का महाग्राम योजना के तहत चयन हुआ है। उनमें सर्वे कराया गया है। विभाग की ओर से चार दशक पुरानी सीवरेज लाइनों और पुरानी पेयजल लाइनों को बदलने का प्रस्ताव तैयार किया है। मुख्यालय से जैसे आदेश आएंगे उसी हिसाब से काम होगा।
-सुनील कुमार, कार्यकारी अभियंता, शहरी सीवरेज शाखा जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग भिवानी।