बवानीखेड़ा। गांव कुंगड़ की ऐतिहासिक और कभी चर्म रोगों से मुक्ति दिलाने के लिए प्रसिद्ध प्राचीन जोहड़ी उपेक्षा और गंदगी की शिकार हो चुकी है।
चारों ओर फैली बदबू, घरेलू कचरे का जमाव और अव्यवस्थित हालात ने ग्रामीणों का जीवन दूभर कर दिया है। बावजूद इसके, प्रशासन और पंचायत स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
ग्रामीण रमेश, बिजेंद्र, जितेंद्र और राजसिंह ने बताया कि इस जोहड़ी की समस्या कई वर्षों से बनी हुई है, लेकिन न तो सरपंच सुनवाई कर रहे हैं और न ही अधिकारियों से कोई सकारात्मक कार्रवाई मिली है। खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी को कई बार लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं।
कभी चर्म रोग मुक्ति का केंद्र, अब संक्रमण का स्रोत
कभी जिस जोहड़ी का जल चर्म रोगों से राहत के लिए दूर-दूर तक मशहूर था, आज वही जोहड़ी खुद गंदगी और संक्रमण का अड्डा बन चुकी है। इसके कुएं में कई बार पशु भी गिरकर चोटिल हो चुके हैं, जिससे ग्रामीणों को अनहोनी की चिंता सताने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया तो गांव की स्वच्छता और प्राकृतिक विरासत दोनों खतरे में पड़ जाएंगी।