दस साल पुरानी पेयजल लाइन स्वास्थ्य विभाग के लिए परेशानी का सबब है। इस कारण पानी खराब हो रहा है और लोगों को स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा।
अब जनस्वास्थ्य विभाग ने कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है। प्रथम चरण मेें जनस्वास्थ्य विभाग 1995 से 2005 के बीच पेयजल कनेक्शन लेने वालों को नोटिस भेज अपने पाइप बदलने के निर्देश देगा। यदि पाइप नहीं बदले गए तो विभाग पाइपों को बदलवाएगा और खर्चा पेयजल बिल में जोड़कर भेजेगा। जनस्वास्थ्य विभाग के इस निर्णय से करीब 10 हजार उपभोक्ताओं पर दो से चार हजार रुपये तक का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
गंदे पानी की सप्लाई का मुख्य कारण 10 साल या इससे ज्यादा पुरानी पेयजल लाइनों को माना जा रहा है। पहले जीआई पाइप लगाई जाती थी, जिनकी उम्र 10 साल तक मानी जाती है। मगर शहर में 1995 से 2015 तक के कनेक्शन चल रहे हैं। इन पाइपों मेें लीकेज की समस्या ज्यादा है।
लीकेज के कारण ही लाइन में पानी खराब होता है और घरों में गंदे पानी की सप्लाई होती है। अब इस समस्या से सख्ती से निपटने का प्लान बनाया गया है। इसमें नगर परिषद व जिला प्रशासन की भी मदद ली जाएगी। पहले सबको को नोटिस देकर आगाह किया जाएगा और फिर पाइप बदलने का अभियान शुरू होगा। जनस्वास्थ्य विभाग के इस निर्णय से करीब 10 हजार उपभोक्ता प्रभावित होंगे और उन पर दो से चार हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
पानी की मांग घटी, प्रेशर से फट रही लाइनें
- रोज करीब 10 जगह लाइन फटने की शिकायत, 20 फीसदी कटौती की तैयारी
भिवानी। सर्दी के साथ पानी की मांग भी कम होने लगी है। अभी 10 प्रतिशत तक मांग घटी है और आगामी कुछ दिनों में मांग और घटने की उम्मीद है। जबकि जनस्वास्थ्य विभाग पूरे प्रेशर से पेयजल सप्लाई कर रहा है। नतीजन हर रोज प्रेशर से लाइनें फट रही हैं। औसतन 10 शिकायतें रोजाना विभागीय अधिकारियों तक पहुंच रही हैं।
मांग कम होने और लाइन फटने की शिकायतों के चलते अब जनस्वास्थ्य विभाग ने पानी की सप्लाई में कटौती करने की तैयारी कर ली है। करीब 20 फीसदी कटौती की जाएगी। 20 नवंबर तक 10 फीसदी कटौती की गई है। 50 की बजाय अब 45 एमएलडी पानी दिया जाएगा और और 20 नवंबर से 15 फरवरी तक 20 फीसदी कटौती करते हुए 40 एमएलडी पानी की सप्लाई की जाएगी।
वर्जन:::
दीपावली बीतने का इंतजार था। अब पानी को गंदा करने का कारण बने 10 साल पुराने पाइप वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ अभियान छेड़ा जाएगा। उन्हें नोटिस दिए जाएंगे कि पाइप या तो खुद बदल लें अन्यथा विभाग बदलेगा और खर्च उनके बिल में जोड़कर भेजा जाएगा। पानी की मांग पर कमी के कारण कटौती की जा रही है।
संजीव त्यागी, एक्सईएन
जनस्वास्थ्य विभाग