चरखी दादरी। सेना में पांचवीं पीढ़ी और दो शहादत। देशभक्ति और बहादुरी की अपने परिवार की इस विरासत व मिसाल को और ऊंचाई देकर शहीद हुए माई खुर्द गांव के नायक सतीश अमर हो गए। जम्मू के हंदवाड़ा क्षेत्र में आंतकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए इस जवान के पिता बीएसएफ से रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर हैं और दो दादा आजाद हिंद फौज में लड़ते हुए शहादत दे चुके हैं। इस परिवार की यह तीसरी शहादत है। बेटे के पार्थिव शरीर के इंतजार में पल पल भारी हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद शहीद के बेटे के पिता का जज्बा देखिये कि उनकी आंखों में आंसू हैं, लेकिन जुबान पर लाल की बहादुरी के किस्से हैं।
सतीश की शहादत की खबर के बाद परिवार और ग्रामीणों की आंखें नम हैं, लेकिन आंखों के पानी में गर्वोक्ति की चमक भी है। बेटे के जाने के गम में डूबे सतीश के पिता आजाद सिंह को इस बात का फख्र है कि बेटे ने शहीद होने से पहले अपने साथियों के साथ दो आतंकियों को मार गिराया। वे यह भी बताना नहीं भूले कि कुछ दिन पहले भी सतीश व उसकी टीम ने दो आतंकवादियों को मारा था।
अमर उजाला से बातचीत में आजाद सिंह ने बताया कि 18 साल की उम्र में उनके बेटे ने फौज ज्वाइन की थी। 2001 में महाराष्ट्र के कामती सेंटर में ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स बटालियन में बतौर सिपाही के पद पर सतीश भर्ती हुआ था। उन्होंने बताया कि बचपन से ही उनका सपना था कि दोनों बेटों में से एक फौज ज्वाइन कर पिछली चार पीढ़ियों से चली आ रही अपनी परंपरा को जारी रखें। उन्हें अपने लाल की शहादत पर फक्र है कि उसने भी देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
सतीश के बड़े भाई जयप्रकाश ने बताया कि शुक्रवार देर शाम उन्हें सतीश की शहादत की सूचना सैन्य अफसरों ने फोन पर दी। सेना की ओर से यह भी सूचना दी गई कि आतंकी हमले में शहीद होने से पहले सतीश ने दो आतंकियों को ढेर कर दिया था। कुछ दिन पहले हुई आतंकी मुठभेड़ में भी सतीश ने दो आतंकवादियों को मार गिराया था। उन्हें गर्व है कि उसके भाई ने अपनी शहादत से पहले चार आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया। वहीं, शहीद की पत्नी प्रमिला व मां केला देवी की आंखें नम तो जरूर हैं, पर सतीश की शहादत की चमक उनमें भी साफ दिखाई दे रही है। रविवार सुबह सतीश का शव गांव माईं कलां पहुंचेगा। ग्रामीण भी नम आंखों से अपने लाडले का शव गांव पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं।