मां बाप तै ज्यादा मोबाइल फोन प्यारे हो रे सै... हर किसी के पास मोबाइल सै और बालक भी पढ़ाई के नाम पै मोबाइल में गेम खेलं सै। जिब तक मोबाइल फोन और टीवी से बच्चों की दूरी कम नहीं होगी, पढ़ाई में मन नहीं लगेगा। कुछ इसी तरह की बातें शहर के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की पीटीएम में अभिभावकों ने शिक्षकों के समक्ष रखी।
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में इस समय दो शिफ्ट में साढ़े तीन हजार छात्राएं छठी से बारहवीं तक पढ़ाई कर रही हैं। इसमें एक हजार छात्राएं दसवीं और बारहवीं की हैं। राजकीय कन्या स्कूल की प्राचार्य किरण गिल ने भी सभी क्लास इंचार्ज की मौजूदगी में लड़कियों की परफॉर्मेंस के संबंध में अभिभावकों को अवगत कराया।
मेगा पीटीएम में पहुंचे अभिभावकों ने स्कूल में पढ़ाई का बेहतर माहौल बताया वहीं टीचरों ने भी बच्चों के रिजल्ट को बेहतर बनाने के लिए स्कूल में पढ़ाई का माहौल ही पर्याप्त नहीं बताया, बल्कि घर पर भी बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने की नसीहत अभिभावकों को दी। मेगा पीटीएम ने कई अभिभावकों ने अपने बच्चों के सरकारी स्कूल में पढ़ाई को लेकर भी अनुभव अन्य अभिभावकों के बीच साझा किए। वहीं टीचरों ने भी बोर्ड परीक्षाओं में मात्र 15 दिन का समय शेष रहने पर खास तौर पर बच्चों को ज्यादा से ज्यादा समय देने की बात कही।
अभिभावकों ने बेवाकी से रखी अपनी राय
मेरे दो लड़के और पांच लड़की हैं। सभी बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ाई करते हैं। मैं थोड़ी बहुत पढ़ी हूं, इसलिए मेरी बेटियों को भी पढ़ाना चाहती हूं। मुझे लगता है कि सरकारी स्कूल में पढ़ाई का माहौल ठीक हैं, मगर हम घर पर बच्चों की पढ़ाई नहीं करा पाते हैं।
- माया देवी, अभिभावक।
मेरी तीन बेटियां हैं, कोई बेटा नहीं है। लड़कियों को पढ़ाना चाहता हूं, इसलिए मेहनत मजदूरी का काम करता हूं। हर मां-बाप बेटियों को ज्यादा से ज्यादा पढ़ाए, उन्हें बोझ न समझे। मेरी दोनों बेटियां छठी से ही सरकारी स्कूल में हैं, पढ़ाई में भी काफी होशियार हैं, इसलिए हमेशा टीचरों के साथ भी उनकी पढ़ाई को लेकर मैं बातचीत करता हूं, ताकि कमियों को दूर कर सकूं और उन्हें पढ़ाई के लिए घर पर भी बेहतर माहौल दे सकूं।
- जनार्धन, अभिभावक।
मेरी तीन बेटियां सरकारी स्कूल में ही पढ़-लिखकर जेबीटी और जीएनएम का कोर्स कर रही हैं। तीसरी छोटी बेटी बारहवीं में पढ़ाई कर रही है। जिसके अच्छे अंक हैं। मेरा मानना है कि आज मोबाइल फोन मां-बाप से भी अधिक प्यारा हो गया है। कोई भी बच्चा या अभिभावक इससे दूर नहीं है। बच्चे पढ़ाई के लिए मोबाइल लेते हैं, मगर उसमें गेम खेलते हैं। ऐसे में बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखना बहुत जरूरी हो गया है। इसमें टीचरों का सुझाव लेने के लिए भी मैं यहां आई हूं।
- नीलम अभिभावक।
टीचरों ने ये दिए अभिभावकों को सुझाव
बोर्ड परीक्षा में मात्र 15 दिन शेष बचे हैं, इसलिए स्कूल में एक्सट्रा क्लास भी लगाई जा रही हैं, लेकिन बच्चों से अब घर जाने के बाद अन्य काम कराने की बजाए उन्हें पूरा समय पढ़ाई के लिए दें, अभिभावक भी उनकी समस्याओं को जानें और उन्हें पूरा समय दें। बच्चा किताब लेकर पढ़ाई कर रहा है तो उसे कॉपी और पैन भी दें और जो कुछ याद किया है उसे लिखकर दोहराने के लिए प्रेरित करें, ताकि उसका याद किया हुआ लिखने से और भी पक्का हो जाए। बच्चों की स्कूल से अनावश्यक छुट्टियां ना कराएं। जिस विषय में बच्चा कमजोर है, उस पर ज्यादा ध्यान दें।
- किरण गिल, प्राचार्य, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय।
अधिकतर बच्चे अंग्रेजी और मैथ में कमजोर हैं। स्कूल में तीन श्रेणियों के अंदर बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही है। जो बच्चे बेहतर ढंग से पढ़ाई कर रहे हैं और जो बच्चे मध्यम दर्जे के पढ़ाई में हैं उनके लिए अलग-अलग व्यवस्था है। जो बच्चे केवल पास होने के लिए भी कड़ी मेहनत कर रहे हैं, उनके लिए पढ़ाई की कमजोरियों को दूर करने के लिए विशेष मेहनत टीचर कर रहे हैं। इसका फायदा ये होगा कि सभी बच्चों की पढ़ाई का स्तर अलग अलग हैं, मगर कक्षा एक ही है। जिसमें कमजोर बच्चों पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है जो बेहतर हैं उसे भी बेहतर तैयारी में मदद मिल रही है।
- राजीव शर्मा, अंग्रेजी प्रवक्ता।
मोबाइल फोन और टीवी से बच्चों को परीक्षा के नजदीक आने पर दूर रखें। इससे बच्चे का मन भटकाव नहीं होगा। बच्चे के रिजल्ट को लेकर क्लास टीचर से अवश्य बात करें। घरेलू कार्य से फ्री रखें। बच्चों के खान-पान पर भी विशेष ध्यान दें। स्कूल की पढ़ाई के बाद बच्चा घर जाने पर भी पढ़ाई से दूर ना हो उसे समय पढ़ाई के साथ अन्य दिनचर्या के कार्यों के लिए शेडयूल बनाकर दें।
- वेदप्रकाश गिल, अध्यापक।