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आरटीआई के तहत सूचना नहीं देने पर शिक्षा निदेशालय के सुपरिटेंडेंट के खिलाफ वारंट के आदेश

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जनसूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत समय पर सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराने वाले गैर जिम्मेदार अधिकारियों पर अब राज्य सूचना आयोग कड़े कदम उठा रहा है। राज्य सूचना आयोग ने मौलिक शिक्षा निदेशालय के एसपीआईओ कम सुपरीटेंडेंट के खिलाफ वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। राज्य सूचना आयोग ने पहली बार आरटीआई की जानकारी नहीं देने वाले किसी अधिकारी के खिलाफ वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं।
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अब तक सूचना आयोग सूचना नहीं देने वाले अधिकारियों पर 25 हजार तक का जुर्माना लगाता आया है। स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने 6 फरवरी 2018 को हरियाणा स्कूली सेकेंडरी शिक्षा निदेशालय से प्रदेश में चल रहे निजी स्कूलों द्वारा फार्म नंबर छह जमा कराए जाने व हरियाणा के अंदर सभी बोर्डों से संबंधित कितने स्थायी व अस्थायी निजी विद्यालय चल रहे हैं, इससे जुड़ी जानकारी आरटीआई से मांगी थी। इस पर मौलिक शिक्षा निदेशालय ने जो जवाब दिया, वह अधूरा था। बृजपाल परमार ने बताया कि इस आरटीआई की सूचना पर डेढ़ साल तक मौलिक शिक्षा निदेशालय कुंडली जमाए बैठा रहा। परमार ने इस मामले में पहली अपील 13 मार्च को सेकेंडरी निदेशक के समक्ष की। इस मामले में कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद 11 मई को मामला राज्य सूचना आयोग के समक्ष पहुंचा। तीन दिसंबर को राज्य सूचना आयोग ने शिक्षा निदेशालय के एसपीआईओ को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए आरटीआई की जानकारी देने के आदेश दिए। 22 फरवरी तक आरटीआई द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराए जाने की अवधि निर्धारित की गई। लेकिन इसके बाद भी जानकारी नहीं दी गई। राज्य सूचना आयोग ने 20 सितंबर को मौलिक शिक्षा निदेशालय के एसपीआईओ कम सुपरिंटेंडेंट अशोक कुमार के खिलाफ जमानती वारंट जारी करते हुए उसे नौ जनवरी तक तलब किया है।
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