अस्तित्व में आने के 47 साल बाद अब औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 को आखिरकार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट मिलेगा। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण काम भी शुरू हो चुका है। प्लांट भिवानी रोहतक मुख्य मार्ग पर गांव पालुवास मोड़ पर बनाया जाएगा। जिसकी चहारदीवारी निर्माण का काम शुरू भी हो चुका है। एसटीपी के नक्शे को भी मंजूरी मिल चुकी है। अब अधिकारी ग्रीन बेल्ट की जगह पर एसटीपी का निर्माण कराएंगे।
15 माह की निर्धारित अवधि के दौरान ही एसटीपी का काम पूरा किया जाएगा। इसके बाद औद्योगिक सेक्टर 21 व 26 की औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाले केमिकल युक्त गंदे पानी की निकासी संभव हो पाएगी और इसी पानी को फिर से औद्योगिक सेक्टर की हरियाली बढ़ाने में इस्तेमाल किया जाएगा। इतना ही नहीं एक्ट्रा ट्रीटमेंट युक्त पानी को लोहारू रोड की भिवानी-घघर ड्रेन में डाला जाएगा, जिसके बाद जिले के किसान इस पानी का इस्तेमाल खेतीबाड़ी में कर पाएंगे। अब तक औद्योगिक सेक्टर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं होने से केमिकल युक्त गंदा पानी ग्रीन बेल्ट और पार्कों के अंदर ही फैलकर यहां हरियाली को चौपट कर रहा है।
भिवानी रोहतक मुख्य मार्ग पर गांव पालुवास के समीप औद्योगिक सेक्टर 21 व 26 में करीबन 350 औद्योगिक इकाईयां बनी हैं। इनमें अधिकांश उद्योग तो प्लास्टिक दाना के हैं, जिनके अंदर से रोजाना ही हजारों लीटर गंदा पानी इस्तेमाल के बाद निकलता है। केमिकल युक्त पानी या तो सड़कों पर फैला रहता है या फिर इसे ग्रीन बेल्ट और नजदीकी सीवरेज मैनहोल में डाल दिया जाता रहा है। इससे औद्योगिक सेक्टर की आबोहवा में भी प्रदूषण घुल रहा है। औद्योगिक सेक्टर में 92 करोड़ रुपये के बजट से माडर्न औद्योगिक सेक्टर के रूप में विकसित किए जाने पर काम चल रहा है। इसी के अंतर्गत 13 करोड़ की लागत से एसटीपी का निर्माण होगा। जिस पर काम शुरू हुआ है।
1972 में अस्तित्व में आए थे सेक्टर 21 और 26 : भिवानी में 1972 में सेक्टर 21 और 26 अस्तित्व में आए थे। शुरूआत में यहां पर केवल चार से पांच औद्योगिक इकाईयां ही स्थापित की गई थी। लेकिन अब 350 औद्योगिक इकाईयां यहां विभिन्न प्रकार की वस्तुओं का उत्पादन कर रही हैं। इनमें सबसे अधिक प्लास्टिक उद्योग शामिल हैं। जबकि मेडिकल लाइन में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और लोहा उद्योग भी शामिल हैं।
ऐसे करेगा एसटीपी काम : औद्योगिक सेक्टर के एसटीपी प्लांट में सभी उद्योगों का गंदा पानी डाला जाएगा। इसके लिए अलग से गंदे पानी की लाइन पूरे इलाके में डाली गई है। जबकि एसटीपी से ही वापस एक पाइप लाइन औद्योगिक क्षेत्र में डाली गई है। जिसके अंदर ट्रीटमेंट के बाद पानी को वापस इस्तेमाल के लायक बनाया जाएगा। इस पानी से ग्रीन बेल्ट व पार्कों के अंदर पेड़ पौधों के रखरखाव में इस्तेमाल किया जाएगा।
एसटीपी का नक्शा मंजूर हो चुका है। इसके निर्माण की शुरूआत की गई है। एसबीआर टेक्नॉलाजी से पानी का ट्रीटमेंट किए जाने के बाद इसको फिर से इस्तेमाल करने लायक बनाया जाएगा। चिह्नित जगह पर काम शुरू करा दिया गया है।
- करूण कुमार, जेई निर्माण विंग, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण
भिवानी के औद्योगिक सेक्टर को 92 करोड़ के बजट से मान औद्योगिक सेक्टर के तौर पर विकसित किया जा रहा है। जो काम चल रहा है। उसके लिए निगरानी कमेटी भी बनी हुई है। मेरी देखरेख में ही काम हो रहा है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की मांग पिछले पांच साल से उठ रही थी, जिस पर अब काम शुरू होने से गंदे पानी निकासी की उम्मीद जगी है।
- धर्मबीर नेहरा, प्रधान भिवानी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन भिवानी