04 फोटो ईंट भठ्ठे पर बरसात के कारण खराब हुई कच्ची ईंटें।
- फोटो : Bhiwani
एनजीटी के आदेशों पर बंद पड़े ईंट-भट्ठों पर दोहरी मार पड़ी है। हाल ही में दो दिन बिगड़े मौसम की वजह से भिवानी जिले के करीब 100 ईंट-भट्ठों पर 10 करोड़ रुपये की कच्ची ईंटों का स्टॉक नष्ट हो गया। जिस वजह से प्रत्येक ईंट भट्ठा मालिक को करीब आठ से दस लाख रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है। ईंट भट्ठा-उद्योग से जुड़े सभी ठेकेदार पहले से ही ईंटों के उत्पादन ठप होने की वजह से मंदी की मार झेल रहे थे, इस पर अब मौसम की दोहरी मार पड़ी है। वहीं ईंट भट्ठा मालिकों को हुए लाखों के नुकसान को लेकर दी भिवानी ईंट-भट्ठा एसोसिएशन पदाधिकारियों ने भी प्रदेश सरकार से नुकसान भरपाई की मांग करते हुए जल्द से जल्द ईंट-भट्ठे चलाने की गुहार लगाई है।
दरअसल दिल्ली सहित एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण की वजह से एनजीटी द्वारा 15 नवंबर से सभी ईंट-भट्ठों व क्रशर जोन पर पाबंदी लगाने के आदेश जारी किए थे। ये आदेश 15 दिसंबर तक जारी किए गए। भिवानी जिला में करीब एक सौ ईंट भट्ठे जिग-जेग तकनीक से संचालित किए जा हैं। इसी तरह तोशाम क्षेत्र में खनन क्षेत्र भी हैं, जिसके अंदर ढाई सौ से अधिक क्रशरों पर शोरगुल थमा हुआ है। ईंट-भट्ठों और क्रशर जोन बंद होने से एक माह पहले तक जो भवन निर्माण सामग्री लोगों को सस्ते दामों पर उपलब्ध हो रही थी, उसमें भी अब उछाल आ गया है। भवन निर्माण सामग्री के अचानक बढ़े दामों से घर बनाना भी अब महंगा हो गया है। निर्माण सामग्री के व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही एनजीटी के आदेशों की पाबंदी नहीं हटी और ईंट-भट्ठे व क्रशर जोन नहीं चले तो भवन निर्माण सामग्री के दाम और भी बढ़ेंगे।
अक्तूबर माह से ही कच्ची ईंटों का स्टॉक हो रहा था तैयार : ईंट भट्ठों पर अक्तूबर माह से ही कच्ची ईंटों का स्टॉक तैयार हो रहा था। लेकिन इसी दरमियान एनजीटी के आदेशों पर ईंट भट्ठे बंद कर दिए गए। लेकिन फिर भी इनमें कच्ची ईंटों का स्टॉक मजदूरों द्वारा तैयार किया जाता रहा, लेकिन ईंटों की पकाई नहीं की गई। इस वजह से प्रत्येक ईंट भट्ठे पर आठ से दस लाख कच्ची ईंटों का स्टॉंक जमा हो गया। कच्ची ईंट की कीमत एक रुपया आंकी जा रही है। इस लिहाज से प्रत्येक ईंट भट्ठे पर आठ से दस लाख का कच्चा माल खुले में ही पड़ा था। गत 12 दिसंबर को हुई तेज बारिश व ओलावृष्टि में कच्ची ईंटें नष्ट हो गई। जिससे ईंट भट्ठा मालिकों को बैठे बिठाए ही लाखों की चपत लग गई।
केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की हिदायतों के अनुसार भिवानी में सभी ईंट-भट्ठे जिगजेग तकनीक से जुड़े हैं, जिनमें प्रदूषण नहीं होता, लेकिन फिर भी एनजीटी ने इन्हें प्रदूषण बढ़ने का हवाला देकर बंद करा दिया। अब बारिश की वजह से कच्ची ईंटों का स्टॉक नष्ट हुआ है, जिससे प्रत्येक ईंट-भट्ठा मालिक को 10 लाख का नुकसान झेलना पड़ा है और सभी कर्ज के नीचे दब गए हैं। इसलिए प्रदेश सरकार ईंट भट्ठा मालिकों को नुकसान भरपाई के लिए मुआवजा दे और पाबंदी को जल्द से जल्द हटाकर ईंट उत्पादन चालू कराए।
- वेदप्रकाश अग्रवाल, प्रधान दी भिवानी ईंट भट्ठा एसोसिएशन भिवानी