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Bhiwani News: ग्राम पंचायतों में कोई मालामाल तो कोई कंगाल, विकास का फिर भी ममाल

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गांव रिवाड़ी खेड़ा आयोजित नवनिर्वाचित पंचायत बैठक में उपस्थित पदाधिकारी विकास कार्यो को लेकर व? - फोटो : Bhiwani
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भिवानी। भिवानी जिले की ग्राम पंचायतों में कोई मालामाल है तो किसी ग्राम पंचायत का खाता खाली होने से कंगाल है। ग्राम पंचायतों ने अब विधिवत रूप से अपना कामकाज संभाला है तो पंचायतों की आमदनी और खाते में पैसे का हिसाब-किताब भी नई पंचायतों ने संभाला है। भिवानी में 30 ग्राम पंचायतें तो ऐसी हैं, जिनके बैंक खातों में 50 लाख से अधिक का फंड जमा है। वहीं 70 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जिनकी खुद की सालाना आमदनी ठीकठाक है। उनके बैंक खातों में भी लाखों रुपये पड़े हैं। जबकि जिले की 212 ग्राम पंचायतें छोटे से बड़े विकास कार्य के लिए भी सरकार की तरफ ताक रही हैं, जिन्हें हर काम के लिए सरकार से बजट की दरकार रहती है। गांवों में विकास न होने का मलाल भी ग्रामीणों को है।
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भिवानी जिले में 312 ग्राम पंचायतों में चुनावों के बाद नई पंचायतों का गठन हुआ है। जिन्होंने अब विधिवत रूप से अपना पंचायती कामकाज भी शुरू किया है। अगर ग्राम पंचायतों की माली हालत को जानें तो जिले के तोशाम खंड के गांव डाडम की पंचायत अमीर पंचायतों में गिनी जा रही है। क्योंकि डाडम पहाड़ की वजह से उसके पास सालाना करोड़ों रुपयों का पैसा पंचायत के पास आता है। फिलहाल भी डाडम पंचायत के खाते में करीब 16 करोड़ का फंड जमा बताया जा रहा है। इस फंड से ग्राम पंचायत अपने हिसाब से मनपसंद विकास कार्य करा सकती है, उसे सरकार से बजट मंजूरी का इंतजार की भी कोई जरूरत नहीं है। इसी तरह तोशाम की ग्राम पंचायत की आमदनी भी ठीकठाक है। तोशाम पंचायत के पास हर माह दुकानों का ही करीब दस लाख रुपये का किराया आ रहा है। इसी तरह कई अन्य पंचायतों के पास भी खुद की आमदनी का स्थायी जरिया है। इससे पंचायत के खाते में हर माह लाखों का फंड एकत्रित हो रहा है। ये फंड पंचायतों की खुद की आमदनी का फंड है तो इसे खर्च करने का अधिकार भी पंचायत के नुमाइंदों को होता है। ये फंड पंचायत सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर किसी भी मद में खर्च कर सकती है, जिसमें नियमों का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।
ग्राम पंचायतों ने विधिवत रूप से अपना कामकाज संभाला है। कोई भी ग्राम पंचायत ग्राम सचिव के माध्यम से बीडीपीओ को विकास कार्यों का प्रस्ताव भेज सकती है। जिसे सरकार के समक्ष बजट मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। लेकिन जिन ग्राम पंचायतों के पास खुद का फंड है और वो इस फंड से कोई भी विकास कार्य गांव में कराना चाहती है, इसके लिए ग्राम सचिव व बीडीपीओ के माध्यम से सीधे हमारे पास भेज सकते हैं, जिसके बाद तकनीकी विंग उसका एस्टीमेट तैयार कराकर कार्य को पूरा करा देगी।
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- प्रवीण बजाज, एसडीओ पंचायती राज तकनीकी विभाग भिवानी।
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