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Bhiwani News: ठोस वजह के बिना ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्लांट नौ साल से बंद पड़ा, लाखों खर्च के बाद भी नहीं ली अधिकारियों ने सुध

Wed, 04 Dec 2024 11:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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प्रदेश के पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बना बहल का ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र। 
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बहल। प्रदेश के पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बना कस्बे का ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्लांट प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। वर्ष 2013 से 2015 तक सुचारू रूप से चलने वाले इस प्रोजेक्ट बिना किसी ठोस वजह के बंद कर दिया गया।
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स्वच्छ भारत अभियान के तहत लाखों रुपये लगाकर बनाया गया यह प्लांट पिछले करीब 9 साल से यह प्लांट बंद पड़ा है। सरकार व प्रशासन की ओर से इसकी कोई सुध नहीं ली जा रही है। लोगों ने अनेक बार प्रशासन से इस बहुआयामी योजना को चालू किए जाने की मांग की है पर प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया।
पीएम नरेंद्र मोदी ने जब देश भर में स्वच्छता अभियान की शुरुआत की थी, तब जिला प्रशासन की ओर से बहल कस्बे में देवी मंदिर के समीप पंचायत की जगह पर प्रदेश का पहला पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र की स्थापना की थी।
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तत्कालीन पंचायत मंत्री ओपी धनखड़ ने इसका शुभारंभ किया था और इसकी उपयोगिता के बारे में जनसभा में कहा था कि इस प्लांट के शुरू होने से कचरे का निस्तारण होगा। जिससे बहल एक सुंदर, स्वच्छ कस्बा होगा। इससे बिजली, गैस की उपलब्धता होगी।
दो वर्ष तक दी खंड विकास कार्यालय को बिजली की सप्लाई

कस्बे का ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र वर्ष 2013 में बनकर तैयार हुआ था। इस पर करीब छह लाख रुपये की लागत आई थी। इसमें कार्यालय, एक बड़ा गड्ढा, कचरे की छंटाई के लिए प्लेटफार्म, गैस प्लांट लगाया गया था। इसके अलावा इसमें गैस से बिजली बनाने वाला जनरेटर सेट भी लगाया गया था। कस्बे के वार्ड नंबर एक व दो से कचरा उठाया जाता था और इस प्लांट में लाकर उसका निस्तारण किया जाता था। कचरा प्लांट से बिजली की एक लाइन खंड विकास कार्यालय तक लगाई गई थी। इससे जरूरत पड़ने पर कचरा प्लांट से खंड कार्यालय में बिजली सप्लाई दी जाती थी। वर्ष 2015 तक इस प्लांट के चलने के बाद बिना किसी वजह के बंद कर दिया था।

कचरा प्लांट में लगी थी केंचुआ खाद की यूनिट

कचरा प्लांट में कचरा निस्तारण व बिजली उत्पादन के अलावा अपशिष्ट पदार्थों से केंचुआ खाद बनाने की योजना बनी थी। इसमें एक के साथ एक सात से आठ हौद बनाए गए थे। इनमें केंचुआ खाद बनाए के लिए कचरा डाला जाता था। योजना थी कि इस प्लांट में आए कचरे का पूरा उपयोग हो जो पंचायत की आमदनी का जरिया बन सके। योजना में बहल की पर्यावरण संरक्षण समिति का विशेष योगदान रहा था। समिति प्रधान डॉ. एनपी गौड़ ने प्रशासन का सहयोग कर इस योजना को सिरे चढ़ाया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कचरा प्लांट के सफल संचालन में सहयोग के लिए डॉ. एनपी गौड़ को विशेष रूप से सम्मानित किया था।

घरों में बांटे थे अलग अलग रंग के डस्टबिन


प्लांट में कचरा एकत्रित करने के लिए पर्यावरण समिति ने घर घर में गीले और सूखे कचरे के लिए डस्टबिन बांटे थे। कचरा एकत्रित करने के लिए दो बिजली संचालित रिक्शा भी खरीदे थे। जो घरों से कचरा उठाकर कचरा प्लांट तक लाते थे। पर, अब देखरेख के अभाव में रिक्शा, जनरेटर सहित अन्य सामान जर्जर हो रहा है। प्रशासन का इस और कोई ध्यान नहीं है।

ग्राम पंचायत ने कचरा प्लांट को इसकी मरम्मत कर चालू करने के लिए बजट जारी करने के लिए प्रशासन को करीब एक साल पहले प्रस्ताव भेजा था। लेकिन, इस बारे में अभी तक बजट जारी नहीं हुआ है। जैसे ही इसका बजट जारी होगा तो प्लांट में जरूरत के अनुसार सुधार कर इसे फिर से चालू किया जाएगा।

- साधूराम पनिहार, सरपंच बहल।

पर्यावरण संरक्षण समिति के प्रयासों से बहल में प्रदेश का पहला पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कचरा प्लांट की स्थापना हुई थी। दो वर्षों तक इसका सही उपयोग हुआ लेकिन बाद में इसे बिना किसी ठोस वजह के बंद कर दिया गया। बाद में भी समिति की ओर से प्रशासन को इस बारे में अवगत कराया था पर एक बहुआयामी योजना ठंडे बस्ते में चली गई।

- डॉ. एनपी गौड़, प्रधान, पर्यावरण संरक्षण समिति, बहल।

बहल जैसे कस्बे में इस प्लांट के सही तरीके से चलने पर गंदगी से निजात मिलती और शहर साफ और स्वच्छ रहता। पर, लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी यह सिस्टम बेहाल है। प्रशासन को चाहिए कि इस प्लांट को फिर से शुरू करें ताकि लोगों को गंदगी से निजात मिले और शहर की स्वच्छता बनी रहे।
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- सज्जन फौजी, बिधनोई निवासी, बहल।
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