नागरिक अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़। संवाद
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भिवानी। सर्दी के सीजन में पानी की कमी के कारण त्वचा रूखी हो रही है, जिसकी जांच करवाने के लिए मरीज नागरिक अस्पताल व निजी अस्पतालों की ओपीडी में पहुंच रहे है। साफ-सफाई में लापरवाही व संक्रमण के कारण फुंसी-फोड़ा व एक्जिमा, खुजली, दाद आदि के मरीज बढ़े हैं। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों में आधे से अधिक इन समस्याओं से पीड़ित हैं। नागरिक अस्पताल में त्वचा रोग विशेषज्ञ की ओपीडी 45 से 50 मीजों की रहती है। इसमें से 20 से 25 मरीजों को शुष्क त्वचा, खुजली, दाद संबंधित दिक्कत रही है।
गर्मी व बरसात के मौसम में वातावरण में नमी रहती है। इससे त्वचा की कोशिकाएं आपस में जुड़ी रहती हैं, लेकिन सर्दियों में ऐसा नहीं होता। ठंड के मौसम में कोशिकाओं में नमी कम हो जाती है, जिससे त्वचा सूखने लगती है और फटने की शिकायत शुरू हो जाती है। अधिक लापरवाही से त्वचा की ऊपरी के साथ निचली सतह भी प्रभावित होकर धीरे-धीरे सूखने लगती है। ऐसे में त्वचा की परत बाहर निकलने लगती है। बाद में वातावरण में मौजूद जीवाणुओं व गंदगी की वजह से त्वचा में संक्रमण के कारण फुंसी-फोड़ा, एक्जिमा, खुजली आदि चर्म रोग हो जाते हैं। इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
रूखी त्वचा से बचने के उपाय
रूखी त्वचा से बचाव के लिए आप अपने नहाने की आदतों को बदल लें। गर्म पानी से नहाने की बजाय हल्के गुनगुने पानी से नहाएं। अपनी स्किन को ठंडी और ड्राई हवा से बचाकर रखें। सर्दियों में स्किन काफी रूखी और बेजान हो जाती है। इसके लिए जरूरी है कि विटामिन ई युक्त मॉइस्चराइजर लगाया जाए। चेहरे को साफ पानी से धोएं और रोजाना रात को और दिन में 3-4 बार अच्छा मॉइस्चराइजर लगाएं।
सर्दी के मौसम में त्वचा से जुड़े रोगों का होना आम बात है, क्योंकि सर्दी बढ़ने के साथ ही त्वचा ड्राई होती है। ड्राइनेस के कारण खुजली और धब्बे पड़ने लग जाते हैं। इसलिए जहां तक हो सके मॉइस्चराइजर क्रीम का इस्तेमाल करें। इस मौसम में नारियल तेल सबसे लाभदायक है। नहाने या सोने के बाद नारियल तेल की मालिश करें।
- डॉ. अदिति अग्रवाल, त्वचा रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल।