बवानीखेड़ा। कस्बा स्थित अनाज मंडी में मंगलवार को डीएपी खाद के लिए किसानों को लंबी लंबी लाइन लगानी पड़ी। बवानीखेड़ा कोऑपरेटिव मार्केटिंग कम प्रोसेसिंग सोसायटी के सामने उन्होंने खाद मिलने का इंतजार किया। फिंगर प्रिंट न मिलने के कारण कई किसानों को मायूसी मिली।
अनाज मंडी स्थित दुकान 36 पर मंगलवार सुबह चार गाड़ियों में डीएपी खाद के करीब 1,520 बैग आए। इसका पता चलते ही कई किसान अपने ट्रैक्टरों, गाड़ियों और अन्य वाहनों के साथ अनाजमंडी में पहुंच गए। इस कारण वहां लंबी लाइन लग गई।
मौके पर मौजूद अखिल भारतीय किसान सभा के खंड प्रधान रामोतार भाकर, खरकड़ी निवासी किसान हरेंद्र, नरेश, सुमराखेड़ा निवासी लीला, नरेंद्र, सत्यवान, राज, पप्पू, सोनू, अनूप शर्मा, दीपक शर्मा ने बताया कि सहकारी समितियों में डीएपी खाद की कमी हो गई है। इस कारण किसान आगामी फसल की बिजाई के लिए चिंतित हैं।
रामोतार ने आरोप लगाया कि हैफेड किसानों को एक आधार कार्ड पर पांच बैग डीएपी के साथ आधा लीटर इफको तरल नैनो डीएपी जबरदस्ती दे रहा है। इस कारण किसानों को 600 रुपये का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ रहा है।
उन्हाेंने खुद डीडीए भिवानी विनोद फोगाट से सभी गांवों की सहकारी समितियों में खाद उपलब्ध करवाए ताकि किसानों को खाद के लिए धक्के ना खाने पड़े। किसानों ने खाद की कमी के चलते सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध किया।
इस बारे में हैफेड प्रबंधक नवीन ने बताया कि डीएपी खाद के साथ आधा लीटर तरल नैनो डीएपी देने की सूचना मिली थी। पता चलते ही उन्होंने इसे देने के लिए मना कर दिया। उन्होंने बताया कि सरसों की बिजाई के लिए ही डीएपी की चार गाड़ियों की खेप मंगलवार सुबह आई है। खाद की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। पिछले सप्ताह भी दो गाड़ियों में करीब 760 बैग डीएपी के किसानों को दिए गए हैं।