वर्ष 2015 में एक तीन मंजिला खंडहर भवन बाड़ी मोहल्ला में गिर गया। इस खंडहर भवन के गिरने से आसपास के तीन अन्य मकान भी क्षतिग्रस्त हुए और अनेक जिंदगी बाल-बाल बची। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया। नगर परिषद ने शहर में सर्वे कर खंडहर भवन मालिकों को नोटिस थमाए। यह सिलसिला अब तक जारी है। पिछले पांच सालों में तीन बार शहर में खंडहर भवनों का सर्वे हुआ और तीन बार ही नोटिस थमाए गए। बावजूद इसके आज भी ये खंडहर भवन खड़े है और कभी भी किसी के लिए भी जानलेवा साबित हो सकते है। नप अधिकारी फिलहाल शिकायतों का इंतजार कर रहे है। शहर में करीब 50 खंडहर भवन है, जिनके गिरने का खतरा बना हुआ है।
शहर के बाड़ी मोहल्ला में शुक्रवार को भी एक खंडहर भवन की दीवार की ईंटें निकलकर गली में गिर गई। यह खंडहर भवन बंद है और इसके आसपास नए मकान बने है। इस कारण आसपास के लोग भी टेंशन में है। बारिश और तेज बिजली कड़कने के समय यहां के लोग काफी घबरा जाते है और उन्हें अनहोनी की आशंका भी बनी रहती है। कुछ लोगों ने इसकी शिकायत भी नगर परिषद कार्यालय में की।
2017 में 11 भवनों को बीएंडआर ने अनसेफ किया था घोषित
2017 में हुए एक हादसे के बाद नगर परिषद के अधिकारियों द्वारा लिखे पत्र पर बीएंडआर विभाग ने कुछ भवनों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद शहर के 11 भवनों को अनसेफ घोषित किया था। बीएंडआर विभाग की रिपोर्ट के आधार पर नगर परिषद के बिल्डिंग इंस्पेक्टर ने सभी 11 भवन मालिकों को नोटिस जारी किए और सात दिन के अंदर-अंदर अपने भवन नियमानुसार तोड़ने के निर्देश दिए। सात दिन में यदि कोई भवन मालिक अपने खंडहर भवनों को नहीं हटाता है तो नगर परिषद की ओर से इन्हें हटाया जाएगा और खर्च भवन मालिक से वसूला जाएगा। नप अधिकारियों ने कहने को तो सात दिन का नोटिस दिया था मगर दो साल बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की।
2017 में भी गिरे दो मकान
वर्ष 2017 में टाइयान पाना में दो जर्जर भवन गिर गए थे। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। इसके बाद ही नगर परिषद ने सर्वे करवाया और खंड़हर भवनों के मालिकों को नोटिस दिए गए थे।
इन इलाकों में अनसेफ घोषित हुए थे भवन, मालिकों को दिए थे नोटिस
- खाड़ी मोहल्ला में चार
- खारी कुई में मस्तान गली के पास एक
- जैन चौक में एक
- पतराम गेट के पास एक
- लोहड़ चौपटा खाद बीज बाजार में एक
- अलबेला गली में एक
- अन्य दो
यहां खौफ बने है खंडहर भवन
शहर की अनेक कॉलोनियों में वर्षों पुराने खंडहर भवन है। शहर के बाड़ी मोहल्ला, पतराम गेट क्षेत्र, बर्तन बाजार क्षेत्र, जैन चौक, घोषियान चौक में खंड़हर भवनों की संख्या ज्यादा है।
शहर के ख्यालीकान गली के अंदर दर्जनों पुरानी हवेलियां हैं, जिन पर करीबन पांच दशक से ताला लगा हुआ है। ये हवेली बारिश के दौरान कभी भी गिर सकती हैं, मगर प्रशासन इनकी कोई सुध नहीं ले रहा है। बारिश के दौरान इन जर्जरहाल हवेलियों का काफी हिस्सा रहरहकर गिर चुका हैं, जब भी कोई हिस्सा टूटकर गिरता है तो आसपास के लोग भी दहशत में आ जाते हैं। समय रहते प्रशासन नहीं चेता को कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
-अजय कुमार, ख्यालीकान गली निवासी।
कई हवेलियां तो डेढ़ सौ साल पुरानी हैं, वह खुद 72 साल की हो चुकी है, उसका मकान भी सौ साल से ज्यादा पुराना है। बारिश के दौरान उसने खुद के जर्जर मकान को छेड़कर पड़ोसी के यहां शरण ले रखी है। वह अकेली ही यहां रहती है। इसलिए पड़ोसियों ने उसकी जान सुरक्षित रखने के लिए उसे जर्जर हाल मकान से निकालकर पास में ही रहने का ठिकाना दे दिया है। वह चाहकर भी मकान नहीं बना सकती और ना ही इसे तोड़ सकती है, क्योंकि कई कानूनी पेचिदगियां उसके आड़े आ रही हैं। अधिकांश मकान का हिस्सा ढह चुका है।
-बिमला घोसियान चौक क्षेत्र निवासी।
खंडहर भवन की शिकायत मिलने पर बीएंडआर के माध्यम से निरीक्षण करवाया जाता है। बीएंडआर कंडम घोषित करें तो ही भवन मालिक को नोटिस जारी कर हटाने के लिए कहां जाता है। पहले की उन्हें जानकारी नहीं कि किस कारण से कार्रवाई नहीं की गई। हो सकता है भवन मालिक कोर्ट चले गए हो या अन्य कोई कारण हो। इसके बारे में पता किया जाएगा।
राजेश महता, सचिव
नगर परिषद