भिवानी। किसी भी बच्चे पर अनपढ़ता का अभिशाप उसके जीवन को दिशाहीन न बना डाले, इसके लिए सर्व शिक्षा अभियान (राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान) के तहत शिक्षा विभाग सर्वेक्षण करा रहा है। स्कूल की डगर से दूर रहने वाले बच्चों को नजदीकी सरकारी स्कूलों से जोड़ने के लिए शहरी दायरे में वार्ड स्तर और गांव में स्कूल स्तर पर ये मुहिम चल रही है। झुग्गी झोपड़ियों, ईंट भट्ठों व स्लम इलाकों में रहने वाले विद्यार्थियों को स्कूल से जोड़ने के लिए टीचर डोर टू डोर सर्वेक्षण में जुटे हैं।
हालांकि भिवानी जिला में ड्रॉप आउट बच्चों की संख्या काफी कम आंकी जा रही हैं, मगर मेहनत मजदूरी की तलाश में प्रवासी मजदूर परिवारों के बच्चे भी जिले की निर्माण साइटों, ईंट भट्ठों व अन्य जगहों पर जुट रहे हैं। ऐसे परिवारों के बच्चों को दो से तीन माह के लिए नजदीकी स्कूलों से जोड़ा जाएगा। इन बच्चों को स्कूलों में अन्य बच्चों के साथ बैठाकर पढ़ाई कराई जाएगी और जब ये परिवार वापस लौटेंगे तो उन्हें शिक्षा विभाग से प्रमाण पत्र भी मिलेगा, जिसके जरिए उनके बौद्धिक आंकलन के बाद उन्हें वहां उसी कक्षा में स्थायी प्रवेश भी मिल जाएगा।
जिले में चल रहे हैं ड्राप आउट बच्चों के लिए आठ स्पेशल ट्रेनिंग स्कूल
सर्व शिक्षा अभियान द्वारा ड्रॉप आउट बच्चों के लिए आठ स्पेशल ट्रेनिंग स्कूल भी खुले हुए हैं। इन विद्यालयों में 14 वर्ष से कम आयु के 20 से 25 विद्यार्थियों को पढ़ाई से जोड़ा जा रहा है। इन बच्चों का शैक्षणिक गतिविधियों के अलावा सह शैक्षणिक गतिविधियों में भी हिस्सेदारी मिल रही हैं, जिससे उनके बौद्धिक और शिक्षा के स्तर में भी सुधार आएगा।
वर्जन:::
जिले में ड्रॉप आउट बच्चों की संख्या काफी कम हैं, लेकिन फिर भी सभी बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए सर्वेक्षण कराया जा रहा है। प्रत्येक सरकारी स्कूल की प्राचार्य को हिदायतें दी गई है कि वे विद्यालय के टीचरों से घर-घर सर्वे कराएं और स्कूल न जाने वाले बच्चों को विद्यालय से जोड़ना सुनिश्चित करें। पढ़ाई किस वजह से बच्चे ने बीच में ही छोड़ दी है या स्कूल में गया ही नहीं है, इसको भी जानना जरूरी है, ताकि इन कारणों का भी विभाग निवारण कर सके।
- नरेश महता, उप जिला शिक्षा अधिकारी भिवानी।