फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सतगुरु जीवन के मार्गदर्शक और मुक्ति के रास्ते के प्रकाशक हैं : कंवर महाराज

विज्ञापन
संगत को प्रवचन करते संत कंवर महाराज। 
विज्ञापन
भिवानी। संत सतगुरु इस धरा पर सोए हुए जीवों को जगाने के लिए आते हैं। यह जीव दुनियादारी के कामों के लिए तो जागा हुआ दिखाई देता है पर प्रभु की भक्ति के लिए अभी भी सोया हुआ है। यह जीव भूल चुका है कि उसे यह सुंदर शरीर प्रभु की भक्ति के लिए मिला था।
विज्ञापन

यह मनुष्य देह एक सुनहरा अवसर है जिसे पाकर वह चौरासी लाख योनियों के जन्म-मरण के इस दुखदायी रोग से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकता है। लेकिन इस दुनिया में आकर अपने आशा और कामनाओं के वश होकर इंसान अपने मूल उद्देश्य को ही भूल चुका है। सतगुरु इसी भूल को मिटाने, इंसान को होश में लाने और उसे चेत करवाने के लिए आते हैं।

यह प्रवचन राधा स्वामी दिनाेद के संत कंवर महाराज ने गांव दिनाेद स्थित आश्रम में उपस्थित संगत काे सत्संग फरमाते हुए कही। उन्हाेंने कहा कि संत सतगुरु अपनी आध्यात्मिक शक्ति का भंडार लेकर अपने सुनिश्चित स्थान पर अवतरित होते हैं और जो अनुरागी जीव हैं। जो इस संसार से बच जाने की चाहत रखते हैं और इस काल के चक्कर से बचना चाहते हैं वे जीव उनके करीब आ जाते हैं। वे उनसे नाम की दीक्षा लेकर, अभ्यास करके अपनी इस नींद से हमेशा हमेशा के लिए छुटकारा पा लेते हैं। आज की दुनिया में तो भक्ति के नाम पर परपंच फैला हुआ है। यह परपंच है गुरुडम का। गुरुडम क्या है? गुरुडम है कि देखा-देखी गुरु-शिष्य बनकर बैठ गए। गुरु बन कर बैठ गए और भोले जीवों को ठगने का माध्यम बना लिया। ऐसे गुरुओं ने प्रभु भक्ति को भी एक व्यवसाय बना दिया, क्योंकि ना उन पर ज्ञान है, ना समझ है, ना कोई त्याग है और ना ही कोई करनी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें