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सरपंचों ने वापस लौटाए पेयजल बिल

Mon, 08 May 2017 12:25 AM IST
bureau
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जन स्वास्थ्य विभाग की ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल बिल भेजने की प्लानिंग फ्लॉप होती नजर आ रही है। कई गांवों के सरपंचों ने पेयजल बिल अधिकारियों को वापस लौटा दिए हैं।
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चंपापुरी के मुख्य जलघर स्थित बिल शाखा में करीब 1200 बिल वापस आ चुके हैं। अब इसी सप्ताह इन उपभोक्ताओं को विभाग की तरफ से नोटिस जारी किए जाएंगे। नोटिस भेजने के बाद भी उपभोक्ताओं ने बिल अदायगी में रुचि नहीं दिखाई तो फिर विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसमें पेयजल कनेक्शन काटने तक का प्रावधान शामिल है।
जिले के ग्रामीण क्षेत्र में इस समय करीब 20 हजार पेयजल उपभोक्ता है।
उपभोक्ताओं की तरफ करीब 64 लाख रुपये की राशि लंबे समय से बकाया चली आ रही है। अधिकारियों की मानें तो इनमें से महज दो-तीन प्रतिशत उपभोक्ता ही नियमित रूप से अपना पेयजल बिल भर रहे हैं। स्वयं सरपंचों का पेयजल बिलों का विरोध करने से ग्रामीण उपभोक्ताओं के हौसले और बुलंद है।
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जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से गांवों में भेजे गए पेयजल बिल सरपंच वापस लौटा रहे हैं। ग्रामीणों द्वारा बिल राशि की अदायगी करने से इंकार कर दिए जाने पर सरपंच भी बेबस  हो गए हैं। पिछले दिनों विभाग की ओर से गांवों में पानी के बिल भेजे गए थे। वहीं सरकार  ग्रामीण उपभोक्ताओं के मार्च 2015 तक के बकाया बिल पिछले दिनों माफ कर चुकी है। जनस्वास्थ्य विभाग को अब तक शहरी पेयजल उपभोक्ताओं से ही पेयजल के रूप में राजस्व मिलता रहा है। गांवों में आज तक कभी पानी के बिल नहीं भेजे गए और न ही किसी ने इस ओर ध्यान दिया।  गांवों में सरेआम अवैध कनेक्शन भी चल रहे हैं जिससे पानी की बर्बादी भी हो रही है और लोग बिल का भुगतान तो कतई नहीं कर रहे हैं। पिछले दिनों विभाग कर्मचारियों ने गांवों में जाकर अवैध कनेक्शनों को रेगूलाइज भी किया था। पिछले दिनों सरकार व विभाग ने सख्त रूख अपनाते हुए निर्णय लिया था कि हर ग्रामीण पेयजल उपभोक्ता को पानी का बिल भरना होगा।  इसके लिए विभाग ने इन उपभोक्ताओं के बकाया बिल तैयार किए थे। विभाग की ओर से ग्रामीण उपभोक्ताओं से 15 अप्रैल 2015 से बकाया बिलों की राशि वसूली जानी है इसके लिए सभी पेयजल कनेक्शन धारकों को  पानी के बिल भेजे जाने की प्लानिंग तैयार की गई थी ताकि वर्षों से बिल न भरने की आदत को भुलाया जा सके और उपभोक्ता बिजली बिल की तरह नियमित रूप से अपने पानी के बिल कार्यालय में आकर जमा करवा सकें।  विभाग ने यह बिल गांव के सरपंचों के पास भेजे थे ताकि सरपंच गांव में उपभोक्ताओं को बिल वितरित करवा सके।
मार्च 2015 तक के हो चुके हैं माफ
सरकार ने ग्रामीण पेयजल उपभोक्ताओं के गत मार्च 2015 तक के  पानी के बिल पहले ही माफ कर दिए हैं अब अप्रैल 2015 से बकाया चले आ रहे बिल का भुगतान उपभोक्ताओं को करना है। गांवों में पेयजल बिल प्रति माह 20 रुपये है। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए यह बिल राशि मात्र 10 रुपये ही है लेकिन फिर भी लोग  बिलों की अदायगी करने में रुचि नहीं ले रहे हैं।
छह से अधिक सरपंचों ने लौटाए बिल
विभाग ने बिल तैयार कर गांवों में सरपंचों के पास बिल भेजे थे ताकि  इन बिलों को हर उपभोक्ता तक पहुंचाया जा सके और उपभोक्ता इस बकाया राशि का भुगतान कर सकें। अब आधा दर्जन से अधिक गांवों के सरपंचों ने ये पेयजल बिल वापस विभाग को लौटा दिए हैं। इन सरपंचों का तर्क है कि लोग पानी बिल की अदायगी से इंकार कर रहे हैं। उपभोक्ता ये बिल लेने से ही मना कर रहे हैं। इस पर इन सरपंचों ने यह बिल वापस जनस्वास्थ्य विभाग को वापस लौटा दिए हैं।  
उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे समय- समय पर अपने बिलों की नियमित रूप से अदायगी करें ताकि सरकारी राजस्व मेें बढ़ोतरी हो। उपभोक्ताओं को विभाग और सरकार का सहयोग करना चाहिए ताकि देश की आमदनी बढ़ सके। कुछ सरपंचों ने बिल पैड वापस भेजी हैं जल्द ही कोई समाधान निकाला जाएगा।
 बिल इंचार्ज, रामरूप जनस्वास्थ्य विभाग
हमने ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं को पेयजल बिल भेजे थे, लेकिन कुछेक सरपंचों ने इन्हें लौटाकर बिल भरने से इंकार कर दिया है। अब हम इन उपभोक्ताओं को नोटिस थमाकर नियमानुसार आगामी कार्रवाई अमल में लाएंगे। पेयजल बिलों की बकाया राशि की रिकवरी जल्द से जल्द करने की हमारी प्लानिंग हैं।
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रामपाल, एसडीओ, जन स्वास्थ्य विभाग
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