भिवानी। मुक्केबाजी में भिवानी की चौकड़ी में शामिल मुक्केबाज सचिन सिवाच, प्रीति पंवार और साक्षी ढांडा एशियाई खेलों राष्ट्रमंडल खेलों जैसा दम नहीं दिखा सकीं। ऐसे में प्रिया घनघस से बड़ी उम्मीद है। प्रिया का सेमीफाइनल मुकाबला बुधवार को होगा। परिजन और कोच को उम्मीद है कि वो बेहतर करेगी और फाइनल में प्रवेश करेगी।
इस प्रतियोगिता में भारतीय मुक्केबाजों को अपेक्षित सफलता नहीं मिलने पर खेल प्रशिक्षकों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, चीन, जापान और मंगोलिया ने इस खेल में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। पश्चिमी देशों का दबदबा कम होता जा रहा है। इस बार भारतीय मुक्केबाजों को कड़ी चुनौती मिल रही है और सभी संघर्ष करते नजर आए। दो महीने पहले राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय मुक्केबाजों ने प्रदर्शन किया। देश के दस खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीते। इनमें हरियाणा से सात और भिवानी से पांच खिलाड़ी शाामिल रहे लेकिन एशियाई खेलों में अपना प्रदर्शन दोहरा नहीं सके। सचिन, साक्षी और प्रीति का तो क्वार्टर फाइनल में ही सफर थम गया।
सुविधाए, खान-पान और ट्रेनिंग की कमी प्रमुख कारण
भारतीय मुक्केबाजों के कमजोर प्रदर्शन के पीछे खेल विशेषज्ञों का कहना है कि खिलाड़ियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं, अंतरराष्ट्रीय स्तर के खान-पान और आधुनिक ट्रेनिंग का अभाव मुख्य कारण है। उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान जैसे देश अपने खिलाड़ियों को अत्याधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों से ट्रेनिंग दे रहे हैं वहीं भारतीय मुक्केबाज अब भी पुरानी कार्यप्रणाली और संसाधनों के भरोसे रिंग में उतर रहे हैं।
तेज बुखार ने रोका सचिन सिवाच का सफर
मुक्केबाज सचिन सिवाच का एशियाई खेलों में पदक जीतने का सपना तेज बुखार के कारण अधूरा रह गया। मुकाबले से दो-तीन दिन पहले बुखार से कमजोरी के बावजूद रविवार को 60 किलोग्राम भार वर्ग में सचिन रिंग में उतरे लेकिन शत-प्रतिशत फिट नहीं होने का असर प्रदर्शन पर पड़ा। सचिन के कोच अनिल टेकराम ने बताया कि बुखार से कमजोरी के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। हालांकि, स्टेमिना और फुर्ती प्रभावित होने से अपना स्वाभाविक खेल नहीं दिखा सके। सचिन जल्द अपनी फॉर्म हासिल कर आगामी प्रतियोगिताओं में बेहतरीन वापसी करेंगे।
एशियाई खेलों में भारतीय मुक्केबाजों की स्थिति
एशियाई खेलों से साक्षी ढांडा, प्रीति पंवार और सचिन सिवाच बिना पदक के बाहर हो चुके हैं। प्रिया घणघस ने कांस्य पदक पक्का कर लिया। बुधवार को पदक का रंग बदलने के लिए सेमीफाइनल मुकाबला खेलेगी। मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। प्रवीन हुड्डा और अंकुश पंघाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में प्रवेश कर लिया है। दोनों मुक्केबाजों से देश को स्वर्ण पदक की उम्मीद बढ़ गई है।
पिछले सात -आठ वर्षों में एशियाई देशों की मुक्केबाजी मजबूत हुई है। कजाकिस्तान और चीन जैसे देश मुक्केबाजी में मजबूत हैं। एशियाई खेलों में भारतीय मुक्केबाज अच्छा कर रहे हैं। कई बार भाग्य की भी बात होती है। खेल में हार-जीत चलती रहती है।- जगदीश सिंह, मुक्केबाजी प्रशिक्षक, द्रोणाचार्य अवार्डी
राष्ट्रमंडल खेलों के मुकाबले एशियाई खेलों में पदक जीतना थोड़ा मुश्किल इसलिए हो जाता है क्योंकि फिलहाल एशिया के शीर्ष देश मुक्केबाजी में अच्छा कर रहे हैं। उनके मुकाबले भारतीय मुक्केबाजों की ट्रेनिंग, खान-पान और सुविधाओं में फर्क भी मुख्य कारण हो सकते हैं। भारत को मुक्केबाजी में कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान जैसे देशों के सामने मुकाबला करना है तो अपने खान-पान, आधुनिक ट्रेनिंग और सुविधाओं को बढ़ाना होगा।- अनिल टेकराम, मुक्केबाज कोच, मिताथल