शहर की मुख्य सीवर लाइनों के ऊपर सड़क धंसी, दोनों विभागों के अधिकारी थोप रहे एक-दूसरे पर जिम्मेदारी
फोटो: 06,07
अभियान: लाइफ लाइन बनी जानलेवा
- मानसून के दौरान धंसी सड़कों से हादसों का खतरा, सरकुलर रोड का डिवाइडर भी धंसा
- शिकायतों पर शिकायतें दे चुके शहरवासी, चार बिंदुओं पर धंसी है मुख्य सड़क
संवाद न्यूज एजेंसी
भिवानी। शहर की मुख्य सड़कें दरक रही हैं, इसकी वजह पुराना सीवरेज सिस्टम को माना जा रहा है। शहर के सरकुलर रोड सहित चार बिंदुओं पर मुख्य सड़क धंस चुकी है। बावजूद इसके पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारी एक-दूसरे पर ही जिम्मेदारी थोप रहे हैं। हालांकि कुछ अर्से पहले भी शहर में सड़कें धंसी थीa, जिसकी वजह मुख्य सीवरलाइन की डैमेज होना पाया गया था। वहां पर सीवर लाइन को नए सिरे से तैयार कराकर उनका समाधान कर दिया, मगर अब कुछ ऐसे बिंदु हैं, जहां पर लगातार सड़कें धंस रही हैं। वहां पर पीडब्ल्यूडी विभाग मिट्टी डलवाकर ऊपर ब्लॉक लगवाकर महज खानापूर्ति ही कर रहा है। जबकि समस्या की जड़ तक कोई नहीं पहुंचा है।
भिवानी शहर के दिनोद गेट पेट्रोल पंप के सामने सड़क लगातार धंस रही है। यहां सीवरलाइन की भी जांच कराई जा चुकी है, जो चालू हालत में है, लेकिन सड़क के नीचे की मिट्टी खिसककर कहां पहुंच रही है, ये किसी को नहीं पता। इसी तरह घंटाघर जिला नागरिक अस्पताल के साथ दीवार पर भी सरकुलर रोड की सड़क काफी बार धंस चुकी है। इसे पीडब्ल्यूडी करीब आठ से दस बार ठीक करा चुका है। लेकिन सड़क किस वजह से धंस रही है, इसका कुछ पता नहीं चला है।
यही हाल महम गेट चौक का है, जहां सड़क के अंदर गहरा होल हो गया है। यहां कोई हादसा न तो इसलिए ट्रैफिक सिग्नल वहां रख दिया है। आसपास की सड़क भी धंस गई है। इसकी किसी ने जांच तक नहीं कराई है कि आखिर ये सड़क किस वजह से धंस रही है। इसी तरह हाइवे के दायरे में आया हालुवास गेट क्षेत्र में भी सड़क धंस रही है। यहां तो डिवाइडर भी सड़क के साथ ही धंस गया है। जबकि हालुवास गेट पर हाल ही में सीवरेज लाइन की धंसी हुई जगह पर नई सीवर लाइन का मेनहोल तैयार कराया था और कुछ हिस्से की लाइन भी बदली गई थी। इसके बाद ही एनएचएआई ने आरसीसी की सड़क तैयार कराई थी। अब आरसीसी की सड़क भी धंस रही है।
-
हादसों का बना अंदेशा, अधिकारी नहीं ले रहे कोई सुध
शहर के अंदर खतरनाक ढंग से धंस रही सड़कों की अधिकारी कोई सुध नहीं ले रहे हैं। हालांकि पीडब्ल्यूडी धंसे हुए हिस्से पर मलबा या फिर ब्लॉक लगवा रहा है, मगर कुछ दिन बाद फिर से सड़क धंसकर पहले वाली स्थिति में ही आ जाती है। जबकि जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग सीवरलाइन के ऊपर धंस रही सड़कों पर अपनी जिम्मेदारी लेने से बच रहा है। अधिकारी अपनी लाइनों को बिल्कुल चालू हालत में बताकर लीकेज की संभावनाओं से ही नकार रहे हैं, वहीं पीडब्ल्यूडी भी सड़क बार-बार रिपेयर कराकर थक चुका है।
ई-रिक्शा के पलटने का रहता है डर
सरकुलर रोड पर धंसे हुए हिस्सों पर डाले गए मलबे या फिर गहरे गड्ढों में सबसे अधिक ई-रिक्शा के पलटने का खतरा बना रहता है। शहर के अंदर इस समय करीब साढ़े चार हजार ई-रिक्शा चल रही हैं। दिनभर सरकुलर रोड पर हजारों ई-रिक्शा गुजरती हैं, जिनका जरा सा संतुलन बिगड़ने पर ही इनके पलटने से हादसा हो सकता है। कई बार ई-रिक्शा धंसी हुई जगहों पर पलट चुकी हैं, जिनमें लोगों को भी चोंटें आई हैं।
शहर के जिन बिंदुओं पर सड़क बार-बार धंस रही है, वहां पर लगातार काफी बार पीडब्ल्यूडी विभाग रिपेयरिंग करा चुका है। हाल ही में भी सड़कों को दुरुस्त कराया गया है। लेकिन ये सड़कें सीवर लाइन की लीकेज के कारण धंस रही हैं। इस संबंध में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अधिकारियों से भी बात हुई है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं है।
-संदीप मित्तल, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी।
-
हमारी सीवर लाइनें बिल्कुल ठीक और चालू हालत में है। जिन जगहों पर सीवर की मुख्य लाइनें डैमेज थीं, वहां पर इन लाइनों को दुरुस्त कराए जाने का काम पूरा हो चुका है। जिन जगहों पर सड़क धंसी हैं, वहां पर कुछ निजी लाइनें हो सकती हैं, जिनकी जांच कराई जा रही है।
-सुनील कुमार रंगा, कार्यकारी अभियंता, शहरी सीवरेज शाखा।