भिवानी। विश्व महिला दिवस पर लैंगिक समानता और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी विषय पर आदर्श महिला महाविद्यालय में अपराजिता के तहत संवाद कार्यक्रम हुआ। इस मौके पर चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय की हिंदी विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. दीपक कुमारी ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। वहीं वैश्य महाविद्यालय भिवानी की अंग्रेजी विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ वंदना वत्स विशिष्ट अतिथि थी।
डॉ. दीपक ने कहा कि राजनीति में दिए गए 33 प्रतिशत आरक्षण से महिलाओं की स्थिति में सुधार की पूरी उम्मीद है। जहां तक चुनाव में महिलाओं की भागीदारी का बात है तो हमारा यह मानना है कि आज चुनाव में जितनी भी महिलाएं आगे आई हैं। वह लोकतंत्र के कारण संभव हो पाया है। चुनाव में महिलाओं की भागीदारी होने से देश आगे बढेगा। कार्यक्रम में आदर्श महिला महाविद्यालय की डॉ. निशा शर्मा भौतिक विज्ञान विभाग, डॉ. ममता वधवा राजनीति विभाग, डॉ. ममता चौधरी हिंदी विभाग, डॉ. नीरू चावला वाणिज्य विभाग, बबीता चौधरी इतिहास विभाग, डॉ. रेनू अर्थशास्त्र विभाग ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में करीब 30 महिला प्राध्यापिकाओं और छात्राओं ने हिस्सा लिया।
महिला प्राध्यापिकाओं ने कहा कि आज के समय में धीरे- धीरे महिलाओं की स्थिति में सुधार होता आ रहा है। चुनाव की बात करे तो इसमें पहले भी महिलाओं की संख्या कम थी और आज भी महिलाओं की संख्या के हिसाब से चुनाव में महिलाओं की भागीदारी कम है। चुनाव में महिलाओं की संख्या में सुधार होने से महिलाओं की स्थिति में भी सुधार आएगी। चुनाव में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से अनछुए आयामों को छूने में भी आसानी होगी। आरंभ से ही महिलाएं राजनीति में पीछे रहने से उनकी स्थिति में सुधार कम हो पाए हैं। जब-जब महिलाओं के हाथ में देश की बागडोर आई है, तब-तब देश में महिलाओं की स्थिति में काफी सुधार आए है। अन्य क्षेत्राें की तरह राजनीति में भी महिलाओं की भागीदारी होने से महिलाएं आगे बढ़ेगी। इसका उदाहरण हमारे देश की राष्ट्रपति है। चुनाव में वोट की महता सबसे बड़ी होती है। इसलिए हमारे कॉलेज में लड़कियों की उम्र होती ही वोट बनवाने की मुहिम शुरू की गई है।
पुरुष आरंभ से ही स्त्री का भाग्य विधाता बना हुआ है और स्त्री जीवन के हर निर्णय वह स्वयं लेता है। आज समय बदल रहा है और स्त्री समाज को आगे बढ़ाने में हर संभव प्रयास कर रही है। जहां महिला मतदाताओं की बात है महिला चुनाव में पुरुषों से अच्छे उम्मीदवार का चुनाव कर सकती हैं। मेरा तो हर राजनीतिक दल से अनुरोध है कि वो ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को टिकट देने का काम करें। आज जितने प्रतिशत टिकट महिलाओं को मिलने चाहिए। उस पर कोई पार्टी खरी नहीं उतरती है। संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी तो निश्चित रूप महिलाओं के अधिकार की बात उठाई जाएगी। -डॉ. दीपक कुमारी, सहायक प्रोफेसर, हिंदी विभाग सीबीएलयू।
आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। पहले के समय में महिलाएं सिर्फ घरों तक ही सीमित रहती थी। आज के समय में ऐसा नहीं है। लैंगिक समानता की बात करे तो आज के समय में पहले की अपेक्षा काफी बदलाव आए हैं। लैंगिक समानता को अपनाकर कोई भी देश समृद्ध हो सकता है। आरंभ से ही हमारे देश की महिलाएं सशक्त रही हैं। प्रत्येक क्षेत्र में महिला सशक्त होने से प्रगति के नए आयाम स्थापित होंगे। हमारे समाज में आधी आबादी महिलाओं की है। आज के समय में प्रत्येक क्षेत्र में महिलाएं आगे बढ़ रही हैं लेकिन संतोषजनक परिस्थिति आने में अभी समय लगेगा। प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनना होगा। तभी सशक्त समाज का निर्माण होगा। - डॉ. वंदना वत्स, सहायक प्राध्यापिका अंग्रेजी विभाग वैश्य महाविद्यालय भिवानी।