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Bhiwani News: अवैध कॉलोनियों की नहीं होगी रजिस्ट्री

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भिवानी। जिला परिषद की शुक्रवार शाम आयोजित बैठक में विकास कार्यों संबंधी कई प्रस्ताव पारित किए गए। चेयरपर्सन अनीता मलिक ने अवैध कॉलोनियों पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी। इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर प्रत्येक तहसील में अवैध कॉलोनियों की रजिस्ट्रियां नहीं करने के निर्देश दिए गए।
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भारत भवन की बोली प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त उपायुक्त दीपक बाबूलाल करवां का धन्यवाद किया लेकिन उनसे आग्रह किया कि जिन अधिकारियों ने कभी कोर्ट केस तो कभी खंडहर का हवाला देकर सदन को गुमराह किया और जिला परिषद की आय को नुकसान पहुंचाया उनसे नुकसान की भरपाई उनके वेतन से की जाए।
बैठक में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि जिला परिषद और डीआरडीए के सभी कार्यों की नोटिंग भुगतान से पहले अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत की जाए और उसके बाद ही भुगतान किया जाए। तोशाम में पोस्टर हटाने के मामले में खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी से पूछा गया कि उन्होंने किस नियम या अधिनियम के तहत आदेश जारी किए।
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यदि एसडीएम के मौखिक आदेश थे तो उनकी लिखित प्रति क्यों नहीं ली गई। इस मामले में तोशाम एसडीएम और बीडीपीओ से लिखित जवाब मांगा गया। बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि अदालत के आदेशों के बावजूद पुलिस प्रशासन कार्रवाई नहीं करता। इस पर सदन की सहमति से पुलिस प्रशासन के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया।
चेयरपर्सन अनीता मलिक ने कहा कि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई है और उन्हें मरवाने के लिए राजनीतिक षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भिवानी, हिसार, दादरी और राजस्थान के अपराधियों को उनके क्रशरों के बाहर खड़ा किया जाता है, जिसकी सीसीटीवी फुटेज भी मौजूद है।
उनका कहना था कि पुलिस अपराधियों को पकड़ने के बाद बिना जांच के छोड़ देती है। यदि उनके या उनके परिवार के किसी सदस्य के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी मंत्री श्रुति चौधरी, पूर्व राज्यसभा सदस्य किरण चौधरी, हरिसिंह सांगवान, पुलिस अधीक्षक और उपायुक्त की होगी।
अनीता मलिक ने यह भी आरोप लगाया कि खानक माइनिंग क्षेत्र में हर माह 11 करोड़ रुपये तथा पत्थर ढोने वाले वाहनों से करीब 1.50 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को इस पर संदेह है तो किसी भी आईएएस, आईपीएस को मौके पर ले जाकर अवैध वसूली दिखाई जा सकती है।
बैठक में यह मांग भी उठाई गई कि जो पुलिस अधिकारी दबाव में किसी निर्दोष को दोषी ठहराते हैं, उनके खिलाफ दूसरे जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों से जांच कराई जाए। गलत दर्ज एफआईआर के मामलों में संबंधित पुलिस अधिकारियों का नार्को टेस्ट कराने की भी मांग रखी।
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