भिवानी। शहर के प्राचीन संत शिरोमणि गुरु रविदास मंदिर में रविदासिया धर्म का संत समागम का आयोजन किया गया। समागम में अखिल भारतीय रविदासिया धर्म संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संत मनदीप दास मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। संत मनदीप दास उपाध्यक्ष अखिल भारतीय रविदासिया धर्म संगठन ने बताया की रविदासिया धर्म की स्थापना 2009 में की गई थी। उन्होंने कहा कि रविदासिया धर्म एक मानवतावादी सोच को प्राथमिकता देता है।
रविदासिया धर्म में सभी संतों की विचारधाराओं पर कार्य किया जाता है। भारत के महान संत गुरु रविदास मानवतावादी संत थे। जिन्होंने पृथ्वी पर हर एक जीव की रक्षा करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास ने भारत देश को प्रबुद्ध राष्ट्र बनाने के लिए अपनी विचारधारा 600 साल पहले ही स्पष्ट कर दी थी। गुरु रविदास समाज कल्याण सभा के प्रधान जोगिंदर चौहान ने बताया कि शनिवार को भिवानी के प्राचीन गुरु रविदास मंदिर परिसर में देश-विदेश से लगभग पांच हजार श्रद्धालुओं ने संत समागम में भाग लिया। रविदासिया धर्म के संतों ने गुरु रविदास की विचारधारा और उनकी वाणी को लोगों तक पहुंचाने का कार्य किया। इस अवसर पर स्वामी मंगलानंद महाराज, प्रधान जोगिंदर चौहान, सतीश नरवाल, सुरेंद्र ढांडा, जोगिंदर सरोहा, शमशेर रंगा, जितेंदर सरोहा, राजेश ग्रेवाल, विक्रम सरोहा, मनीष सिंहमार, जुगनू मेहरा आदि मौजूद रहे।
पितृपक्ष पर मोनिका भारद्वाज ने एक त्रिवेणी सहित 51 पौधों का किया रोपण
भिवानी। पितृपक्ष में पौधरोपण के महत्व को समझते हुए पुराना पटवार खाना निवासी मोनिका भारद्वाज ने अपनी सास रेखा भारद्वाज की स्मृति में लाल अखाड़ा वाला मंदिर के नजदीक स्थित सेठ मूलचंद झील पर एक त्रिवेणी सहित 51 पौधों का रोपण किया। इस दौरान पंडित आनंद शास्त्री ने मंत्र उच्चारण के साथ पौधे रोपित करवाएं। इस मौके पर मोनिका भारद्वाज ने कहा कि पितृपक्ष में पौधरोपण का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इसे हमारे पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का एक पवित्र कार्य माना जाता है। भारतीय संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण को धार्मिक और आध्यात्मिक क्रियाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष में पौधों का रोपण न सिर्फ पर्यावरण की सुरक्षा के लिए, बल्कि हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का एक प्रयास भी है। इस अवसर पर स्नेह लता शर्मा, सुनीता शर्मा, शिवानी शर्मा, अंकित शर्मा मौजूद रहे।