जिले के करीब 20 गांवों में तेज बारिश के साथ जमकर ओले पड़े। गांवों के खेत शिमला जैसे नजर आ रहे थे और धरती ओलों की चादर से ढकी हुई थी। बारिश से भिवानी चारा मंडी में रखा हजारों क्विंटल गेहूं भीग गया। ओलो से सरसों की अच्छी फसल की उम्मीद लगाये बैठे किसानों के अरमानों पर पानी फिरा। हालांकि नुकसान कितना है, यह तो एक-दो दिन बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। ओलावृष्टि से सरसों की फसल को लेकर किसान चिंतित है। अधिकतर किसानों का कहना है कि फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। शहर के अधिकतर गांवों में बारिश भी हुई। जो फसलों के लिए बेहतर बताई जा रही है। शहर में हुई बारिश से कुछ गलियों में जलभराव लोगों के लिए परेशानी भी बना। बहल, तोशाम, लोहारू, बवानीखेड़ा सभी खंडों के काफी गांवों में बारिश और ओलावृष्टि हुई।
मंगलवार देर रात से ही बूंदाबांदी शुरू हो गई थी। बुधवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे भी बूंदाबांदी हुई और दिनभर आसमान में बादल छाए रहे। दोपहर के समय भी हलकी बूंदाबांदी हुई। शाम चार बजे आसमान में काली घटाएं छा गई और अंधेरा छा गया। करीब पौने पांच बजे तेज बारिश शुरू हुई। करीब 20 मिनट तेज बारिश हुई और हलकी ओलावृष्टि भी हुई। इसके बाद भी बूंदाबांदी होती रही। बारिश से शहर के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या रही। उधर, तोशाम में देर शाम तेज बारिश हुई। हलकी ओलावृष्टि भी विभिन्न गांवों में हुई। करीब 10 एमएम बारिश दर्ज की गई।
15 मिनट जमकर बरसे ओले : दोपहर करीब ढाई बजे शहर के नजदीकी गांवों निनान, कोंट, उमरावत, पूर्णपुरा, ढाणा लाडनपुर, धारुहेड़ा, कायला, बड़ाला, सांगा आदि गांवों में जमकर ओलावृष्टि हुई। उमरावत में तो धरती ओलो की सफेद चादर से ढकी नजर आ रही थी।
किसान मांगेराम, रामधारी, पुरुषोत्तम, कुलदीप, संदीप कुमार ने कहा कि उन्होंने अपने खेतों में सरसों की फसल उगा रखी थी ओलों से उनकी फसल को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। अधिकतर किसानों ने तो ठेके पर जमीन लेकर के सरसों की फसल उगा रखी थी। उन्होंने कहा कि आज जो ओलावृष्टि हुई है, उससे उनकी सारी फसल तबाह हो गई। किसानों का कहना है कि वे केवल बारिश के पानी पर ही निर्भर हैं और आज जो बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है, उसने किसानों को बर्बादी के रास्ते पर लाकर खड़ा कर दिया है। किसानों ने सरकार से गिरदावरी करवाकर उचित मुआवजे की मांग की है।
बहल के 15 गांवों में बरसे ओले, फसल और सब्जियां हुई खराब
क्षेत्र के करीब 15 गांवों में बुधवार को दोपहर बाद आई बरसात के साथ ओलावृष्टि हुई। ओलावृष्टि से सरसों की अगेती फसल में काफी नुकसान हुआ है। इसके अलावा ओलावृष्टि की मार से सब्जियों व अन्य फसलों में नुकसान हुआ है। वहीं, चने व गेहूं की फसल में बारिश से फायदा भी हुआ है। किसानों ने प्रभावित फसलों की गिरदावरी कर मुआवजे की मांग की है।
बारिश मंगलवार रात से ही शुरू हो गई थी। बुधवार दोपहर बाद मौसम में तेज गड़गड़ाहट के साथ रिमझिम बारिश शुरू हो गई। कुछ देर की बारिश के बाद ओलावृष्टि शुरू हुई जो रह रह कर चलती रही। क्षेत्र के गांव सिरसी, चैहड़ खुर्द, सुधीवास, सुरपुरा, पाजू, नांगल, सोरड़ा जदिद, सोरड़ा कदिम सहित अन्य गांवों में ओलावृष्टि का समाचार मिला है। ओलावृष्टि से सरसों की जो फसल अगेती बोई गई थी उसमें जमकर नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि व तेज बारिश से सरसों की फसल जमीन के समानांतर बिछ गई और कई खेतों में फसल तहस-नहस हो गई। किसानों ने बताया कि बारिश व ओलावृष्टि से जहां सरसों की फसल में नुकसान हुआ है वहीं गेहूं तथा चने की फसल में फायदा भी हुआ है। किसानों ने बताया कि उन्होंने सरसों की अगेती फसल इस उम्मीद से बोई थी कि अच्छी पैदावार होगी। लेकिन, ओलावृृष्टि से उनके अरमानों पर पानी फिर गया है। महंगे खाद, बीज व दवाइयां लेकर फसल की बुवाई की थी लेकिन ओलावृष्टि से सब कुछ बर्बाद हो गया है।
26 फोटो तेज बारिश में सरकुलर रोड से जाते वाहन ।- फोटो : Bhiwani
31 फोटो गांव सेरड़ा जदीद में ओलावृष्टि से प्रभावित हुई फसल।- फोटो : Bhiwani