भिवानी। संतों का उपदेश उनके लिए नहीं है जो जगत कामनाओं में फंसे पड़े हैं। जीवन की परेशानियों से क्या घबराना। ये परेशानियां किसको नहीं आती, लेकिन विवेकी इनसे जल्दी पीछा छुड़ा लेता है। यह सत्संग वाणी राधास्वामी संत कंवर महाराज ने दिनोद गांव में स्थित राधास्वामी आश्रम में फरमाए।
कंवर महाराज ने फरमाया कि सत्संग नाम उस विचार का है, जिसमे परमात्मा का गुणगान होता है। इंसान को उसके असल कर्म करने की प्रेरणा देता है। सत्संग इस जगत के मिथ्या नातों से बचा कर सच्चा नाता जोड़ता है। उन्होंने कहा कि संतों का उपदेश उनके लिए नहीं है जो जगत कामनाओं में फंसे पड़े हैं। महाराज ने फरमाया कि जीवन की परेशानियों से क्या घबराना। उन्होंने कहा कि प्रारब्ध कर्म हमारा जीवन तय करता है। ये जीवन भी कर्मों की डोर से लिपटा है। जो अपने कर्म कटवा लेता है वो इस आवन जान से मुक्ति पा लेता है। कर्मों का निपटान मन की वृत्तियों को बांधने से होगा। जो जीव अपने कर्मों की गठड़ी को उतार कर फेंक देगा उसे जगात नहीं देनी पड़ेगी। प्रारब्ध से बचना चाहते ही तो संतों की संगति करो। संतों के वचन में रहो।
उन्होंने कहा कि हैरत की बात है कि हर कोई ये सोचता है कि सारा संसार मर जायेगा लेकिन मैं नहीं। इसी डर में वो हर रोज हर पल मरता है। इस डर से केवल पूर्ण गुरु ही आपको बचा सकता है। उन्होंने कहा कि राम की तलाश करते हो और संत से दूर रहते हो तो ये सम्भव नहीं है। राम और संत में अंतर नाही। राम के दर्शन संत के माही। भक्ति का रास्ता तो स्वयं आपसे निकलता है। यदि घर में मां-बाप को कष्ट देकर, गाली देकर आप भक्ति कमाना चाहते हो तो ये असंभव है। असली राम असली परमात्मा आपके माता-पिता हैं। उनकी सेवा सत्कार करके ना सिर्फ हम भक्ति कमाते है, बल्कि हम आने वाली पीढ़ी में संस्कार उगाते हैं। दीं अधीन बनो परमात्मा स्वयं प्रकट होगा। वो चतुराई में नहीं मिलेगा सरलता में सहजता में मिलेगा।
महाराज ने कहा कि अपना सा जीव सब को मानो। यदि आपको किसी वचन से, किसी कार्य से, किसी घटना से दुख होता है तो याद रखो दूसरों को भी आपके गलत आचरण से कष्ट होता होगा। उन्होंने कहा कि पशु-पक्षियों का भी ख्याल रखना। उनके लिए भी दाना-पानी का प्रबंध करके रखना। पर्यावरण और प्रकृति का संरक्षण करना। नशे विषयों से दूर रहना। पाप कर्म से बचना।