भिवानी। प्रदेश में मानसून की दस्तक दहलीज पर है, लेकिन सिंचाई विभाग की लापरवाही एक बार फिर किसानों की चिंता बढ़ा रही है। बवानीखेड़ा व मुंढाल क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों में जलभराव की पुरानी समस्या इस बार भी किसानों की फसलों को प्रभावित कर सकती है। वजह है- बरसाती पानी की निकासी के लिए बनाए गए पंपिंग हाउस या तो अधूरे हैं या उनमें बिजली के कनेक्शन तक नहीं हैं।
बता दें कि इन क्षेत्रों में बारिश के दौरान करीब दो हजार एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि जलभराव की चपेट में आ जाती है। किसानों की धान की फसल बर्बाद हो जाती है और अगली फसल की बुवाई भी समय पर नहीं हो पाती, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
अधूरे पंपिंग हाउस, गायब ट्रांसफार्मर
सिंचाई विभाग ने बरसाती पानी निकालने के लिए खेतों में पंपिंग हाउस व पाइप लाइनें तो बिछा दी हैं, परंतु इन पंपिंग हाउसों को संचालित करने के लिए बिजली कनेक्शन नहीं दिए गए। कुछ स्थानों पर ट्रांसफार्मर ही गायब हैं। नतीजतन, खेतों से पानी ड्रेन में पहुंचाने की पूरी योजना अधूरी पड़ी है। हालांकि पाइप लाइनें बिछ चुकी हैं और ड्रेनों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जा चुकी है, पर जब तक पंपिंग हाउस चालू नहीं होते, तब तक यह पूरी योजना सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। किसानों की उम्मीदें अब इस बात पर टिकी हैं कि मानसून से पहले ये व्यवस्थाएं समय पर दुरुस्त हो जाएं।
ये गांव झेल रहे परेशानी
मुंढाल, बवानीखेड़ा, कुंगड़, सिवाड़ा, भैणी, तालू, जताई, धनाना, रामपुरा, अलखपुरा, रतेरा, मदनहेड़ी, सिसर, जमालपुर, सूई, सिप्पर, हाजमपुर, सुखपुरा, पपोसा, किरावड़, दाईमा और सिंघवा जैसे गांव जलभराव से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
विभागीय दावा
पंपिंग हाउसों में बिजली कनेक्शन देने का कार्य जारी है और इसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। विभाग की मेकेनिकल विंग इस कार्य में लगी है और जहां भी कोई कमी है, उसे दूर किया जा रहा है। हम प्रयास कर रहे हैं कि किसानों को जलभराव की समस्या का सामना न करना पड़े। - प्रवीन, एसडीओ, मेकेनिकल विंग, सिंचाई विभाग