भिवानी। संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रीय आह्वान पर उपायुक्त कार्यालय के सामने धरना देकर पंजाब के किसानों के साथ पंजाब सरकार द्वारा पुलिसिया दमन के विरोध में प्रदर्शन किया। अपनी मांगों के समर्थन में उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति और पंजाब के राज्यपाल के पास ज्ञापन भिजवाया। उपायुक्त की तरफ से ज्ञापन लेने नगराधीश अनिल कुमार किसानों के बीच पहुंचे।
इस दौरान किसान नेता रवि आजाद, कामरेड ओमप्रकाश, कमल सिंह प्रधान व रोहतास सैनी ने आरोप लगाया कहा कि पंजाब व केंद्र सरकार ने शंभू व खनौरी बॉर्डर पर आंदोलनरत किसानों के साथ बातचीत का ढोंग रचकर उनको अचानक गिरफ्तार कर लिया। इसके अलावा लाठीचार्ज किया और उनके ट्रैक्टर व अन्य वाहन जब्त कर लिए। इन दोनों सरकारों की इस बर्बर कार्रवाई के विरोध में पूरे देश में संयुक्त किसान मोर्चा प्रदर्शन व धरने कर रहा है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपने 9 दिसंबर 2021 में किए गये वायदों से मुकर रही है। इसमें डाॅ. स्वामीनाथन आयोग के अनुसार, लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य के सांविधानिक गांरटी देने, बिजली निजीकरण बिल वापस करने और किसानों को कर्ज मुक्त करने का वादे किए थे। अब केंद्र सरकार उन वादों को पूरा करने के बजाय नया मंडी कानून प्रारूप लेकर आ रही है।
यह खेती पर काॅरपोरेट कब्जा करने व मंडी व्यवस्था को समाप्त करने का काम करेगा। उन्होंने हरियाणा सरकार से मांग की है कि भिवानी व दादरी में 2023 की खरीफ फसल का 350 करोड़ रुपये के बीमा घोटाले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच करवाए और आरोपियों को सजा दिलवाई जाए। 2023 व 2024 का 300 करोड़ से अधिक बकाया मुआवजा भी किसानों को दिलवाया जाए।
मंडियों में सरसों, गेहूं व अन्य फसलों की सरकार की ओर से घोषित एमएसपी पर खरीद सुचारू रूप से सुनिश्चित की जाए। इस मौके पर किसान नेता डाॅ. बलबीर ठाकन, मास्टर शेर सिंह, गंगाराम स्योराण, आजाद सिंह मिरान, सुंदर कोच, जोगेंद्र तालू, राजेश कुंगड़, प्रताप सिहं सिंहमार, महाबीर फौजी, नरेंद्र धनाना, मजदूर नेता कामरेड, अनिल कुमार, धर्मबीर सिंह ने संबोधित किया।